Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के पशुपालकों के लिए एक बेहतरीन कल्याणकारी योजना की शुरुआत की है। चारा नीति के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य योजना के अंतर्गत किसानों को नैपियर घास की जड़ें (रूट स्लिप) मुफ्त उपलब्ध कराई जाएंगी। इस विशेष सरकारी स्कीम का लाभ उठाने के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अरविंद कुमार शाही ने इस नई योजना की विस्तृत जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि इस सरकारी कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राज्य में हरे चारे के उत्पादन को तेजी से बढ़ाना है। इससे पशुओं के लिए पौष्टिक चारे की कमी को आसानी से दूर किया जा सकेगा।
जानिए कौन से लोग ले सकते हैं योजना का लाभ
इस लाभकारी योजना का हिस्सा बनने के लिए सरकार ने कुछ जरूरी पात्रता और शर्तें तय की हैं। योजना के तहत पंजीकृत गोशालाएं और गोआश्रय स्थल आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा इच्छुक प्रगतिशील कृषक, निजी पशुपालक, गैर सरकारी संस्थाएं (एनजीओ), एफपीओ और महिला स्वयं सहायता समूह भी इसमें शामिल हो सकते हैं।
इस डिजिटल युग में पशुपालन विभाग ने इस ऑफलाइन आवेदन प्रक्रिया को बेहद सरल बनाया है। विभाग ने इस चालू वित्तीय वर्ष के लिए कुल 25 लाभार्थियों का लक्ष्य निर्धारित किया है। योजना का लाभ लेने के इच्छुक उम्मीदवार आगामी 25 जून तक अपना आवेदन फॉर्म कार्यालय में जमा कर सकते हैं।
आवेदन के लिए ये शर्तें पूरी करना है बेहद जरूरी
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक के पास कम से कम 0.2 हेक्टेयर सिंचित भूमि होनी चाहिए। इसके साथ ही उस जमीन तक आवागमन सुगम होना आवश्यक है। प्रशासन पंजीकृत गोशाला या अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल से संबंधित ग्राम पंचायतों के आवेदकों को चयन में पहली प्राथमिकता देगा।
इसके अतिरिक्त जिन पशुपालकों के पास टैग्ड चारागाह भूमि उपलब्ध है, उन्हें भी वरीयता मिलेगी। सरकार ने सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए अनुसूचित जनजाति और महिला मुखिया वाले ग्रामीण परिवारों को विशेष प्राथमिकता दी है। इन चुनिंदा परिवारों को नैपियर घास की जड़ें पूरी तरह निःशुल्क दी जाएंगी।
पशुपालक इस योजना से जुड़ी किसी भी अन्य विशेष जानकारी या समस्या के समाधान के लिए सीधे मुख्य पशु चिकित्साधिकारी कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। वहां मौजूद प्रशासनिक अधिकारी आवेदन फॉर्म भरने और पात्रता नियमों को समझने में आवेदकों की पूरी मदद करेंगे।
Author: Ajay Mishra

