India News: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे आम लोगों की रसोई तक पहुंच गया है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति में भारी रुकावट के कारण भारत में ईंधन संकट गहराता दिख रहा है। इस चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने केरोसिन की अस्थायी वापसी का फैसला किया है। 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 60 दिनों के लिए सुपीरियर केरोसिन ऑयल की आपूर्ति को मंजूरी दी गई है।
पेट्रोल पंपों से बिकेगा केरोसिन, हर जिले में दो पंप होंगे चुनिंदा
नई व्यवस्थाके तहत सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के कुछ चुनिंदा पेट्रोल पंपों को केरोसिन के भंडारण और बिक्री की अनुमति दी गई है। हर पंप अधिकतम 5,000 लीटर केरोसिन रख सकेगा। प्रत्येक जिले में अधिकतम दो पंपों को यह जिम्मेदारी दी जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इसका उपयोग केवल खाना पकाने और रोशनी जैसी घरेलू जरूरतों के लिए ही किया जाएगा। दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे राज्य इस व्यवस्था में शामिल हैं।
पश्चिम एशिया संकट ने उलट दी सरकार की योजनाएं
इस संकट कीमुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता टकराव है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद हालात बिगड़े। जवाब में ईरान ने रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित कर दिया। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 फीसदी संभालता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर काफी निर्भर है। ऐसे में आपूर्ति बाधित होने का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ा है।
पहले क्यों बंद किया गया था केरोसिन?
पिछलेकुछ वर्षों में सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना और सौभाग्य योजना जैसी योजनाओं के जरिए एलपीजी और बिजली को बढ़ावा दिया। इसके चलते पीडीएस के जरिए केरोसिन की बिक्री धीरे-धीरे बंद कर दी गई। कई राज्यों ने खुद को “केरोसिन मुक्त” घोषित कर दिया था। लेकिन वैश्विक संकट के कारण सरकार को यह कदम उठाना पड़ा। आपूर्ति को तेज करने के लिए पेट्रोलियम नियमों के कुछ लाइसेंसिंग प्रावधानों में अस्थायी छूट दी गई है। हालांकि, पेसो के सभी सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य रहेगा।

