Asansol News: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रहे आंतरिक विद्रोह के बीच आसनसोल के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। पिछले कुछ दिनों से ‘बिहारी बाबू’ के बागी गुट में शामिल होने की अटकलें काफी तेज थीं।
इन तमाम राजनीतिक चर्चाओं पर विराम लगाते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने मीडिया को दिए एक खास इंटरव्यू में खुलकर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि वे पार्टी के अंदर चल रही बगावत से अच्छी तरह वाकिफ हैं, लेकिन उनका स्टैंड एकदम स्पष्ट है।
ममता बनर्जी के प्रति अटूट वफादारी, नेतृत्व पर उठाए सवाल
सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे अभिषेक बनर्जी को अपना नेता नहीं मानते हैं। यह टिप्पणी तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के लिए असहज स्थिति पैदा करने वाली है।
हालांकि, ममता बनर्जी के प्रति अपनी अटूट निष्ठा जाहिर करते हुए शत्रुघ्न ने कहा कि कठिन समय में दीदी उनके साथ खड़ी रही थीं। इसलिए वे उन्हें धोखा देने के बारे में सोच भी नहीं सकते। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के साथ अपने पुराने भावनात्मक जुड़ाव का भी जिक्र किया।
पार्टी छोड़कर जाने वाले बागी नेताओं पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग आज टीएमसी को छोड़ रहे हैं, उन्हें भविष्य में जनता को जवाब देना होगा। राजनीति में पद से ऊपर नैतिकता होती है। विपक्ष को एकजुट होकर ही अपनी असली ताकत दिखानी होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली और ऊर्जा की जमकर तारीफ
एक तरफ ममता बनर्जी के प्रति वफादारी की बात करते हुए, दूसरी तरफ उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली की प्रशंसा भी की। उन्होंने माना कि उनके राजनीतिक करियर को शुरू करने और आगे बढ़ाने में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का एक बहुत बड़ा योगदान रहा है।
उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी निश्चित रूप से तारीफ के हकदार हैं, उनकी ऊर्जा गजब की है और वे 24 घंटे काम करने वाले नेता हैं। उनका यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि बीजेपी छोड़ने के पीछे उनके वैचारिक मतभेद थे।
इंटरव्यू के दौरान उन्होंने माना कि भले ही वे टीएमसी में हैं, लेकिन उनके बेटे कुश सिन्हा का झुकाव भाजपा की तरफ है और यह उनका व्यक्तिगत निर्णय है। राजनीति के इस मंझे हुए खिलाड़ी ने अंत में संदेश दिया कि देश और जनता के हित में ही राजनीति होनी चाहिए।

