West Bengal News: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय सबसे बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बनी पहली भाजपा सरकार को सत्ता संभाले महज तीन हफ्ते हुए हैं। इतने कम समय में ही राज्य सचिवालय ‘नवान्न’ से लेकर सड़कों तक नीतिगत बदलाव साफ दिखने लगे हैं।
नई सरकार ने सत्ता संभालते ही साफ संदेश दे दिया है कि अब राज्य में तुष्टीकरण की राजनीति पूरी तरह खत्म होगी। कैबिनेट की शुरुआती बैठकों में धर्म के आधार पर मिलने वाले विशेष भत्तों को बंद करने का साहसिक फैसला लिया गया है। अब सभी कल्याणकारी योजनाएं केवल पात्रता के आधार पर ही लागू की जाएंगी।
कानून व्यवस्था को पटरी पर लाना इस सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है। हाई कोर्ट के आदेशों का सख्ती से पालन कराते हुए खुलेआम पशु वध पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर होने वाली ऐसी गतिविधियों पर लगाम कसी गई है जिससे आम जनता को परेशानी होती थी।
आंतरिक सुरक्षा और सीमा पर अभेद्य घेराबंदी
भौगोलिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील ‘चिकन नेक’ यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा के लिए सरकार ने जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है। अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर घुसपैठ रोकने के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) को फेंसिंग के लिए जमीन ट्रांसफर करने की प्रक्रिया में तेजी लाई गई है। घुसपैठियों की पहचान के लिए होल्डिंग कैंप भी बनाए जा रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के फैसले और उनके सांस्कृतिक प्रतीक बंगाल की लुप्त होती सनातन संस्कृति को पुनर्जीवित कर रहे हैं। सरकारी कार्यक्रमों में महापुरुषों और सांस्कृतिक विरासत को मिल रहा सम्मान यह दिखाता है कि अब बंगाल अपनी मूल पहचान पर गर्व कर रहा है। सत्ता का केंद्र अब पूरी तरह बदल चुका है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प में बंगाल को अग्रणी बनाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। पारदर्शी जनगणना और अवैध नागरिकों की पहचान से राज्य के संसाधनों पर वास्तविक नागरिकों का हक सुनिश्चित होगा। शांति और निष्पक्ष कानून व्यवस्था से बंगाल एक बार फिर पूर्वी भारत का सबसे बड़ा आर्थिक केंद्र बनने की राह पर है।
Author: Sourav Banerjee

