Prayagraj News: उत्तर प्रदेश के शंकरगढ़ विकास खंड में बिना मान्यता वाले निजी क्लीनिकों और कथित झोलाछाप डॉक्टरों के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्र के अधिवक्ता ऋषभ मिश्रा ने उपजिलाधिकारी बारा को पत्र लिखकर पूरे ब्लॉक में चल रहे संदिग्ध चिकित्सकीय संस्थानों की तत्काल और निष्पक्ष जांच कराने की पुरजोर मांग की है।
अधिवक्ता का आरोप है कि ग्रामीण अंचलों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग मरीजों का उपचार कर रहे हैं, जिनके पास न तो कोई वैध चिकित्सकीय डिग्री है और न ही आवश्यक पंजीकरण। ऐसी लापरवाही से आम लोगों के जीवन पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है, जिसे देखते हुए प्रशासन का सख्त कदम उठाना बेहद जरूरी है।
स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर खड़े सवाल
अधिवक्ता ने अपनी शिकायत में स्वास्थ्य विभाग पर उदासीनता का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पहले भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से शिकायत की गई थी, लेकिन आश्वासन के अलावा कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। प्रशासन की इसी ढिलाई के कारण अवैध रूप से इलाज करने वाले झोलाछाप डॉक्टरों के हौसले दिन-ब-दिन बुलंद होते जा रहे हैं।
नारीबारी स्थित एक निजी अस्पताल की जांच प्रक्रिया पर भी उन्होंने गंभीर प्रश्न उठाए हैं। उन्होंने तर्क दिया है कि किसी एक संस्थान को क्लीन चिट देने से पूरी जांच की निष्पक्षता संदिग्ध हो जाती है। पूर्व में मिली ढेरों शिकायतों के बावजूद केवल खानापूर्ति करना ग्रामीण क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ बड़ा अन्याय माना जा रहा है।
विशेष जांच अभियान चलाने का अनुरोध
अधिवक्ता ने मांग की है कि स्वास्थ्य विभाग, प्रशासनिक अधिकारियों और अन्य संबंधित एजेंसियों की एक संयुक्त टीम गठित की जानी चाहिए। यह टीम पूरे शंकरगढ़ ब्लॉक में विशेष सघन अभियान चलाकर निजी अस्पतालों व क्लीनिकों के दस्तावेजों की बारीकी से जांच करे। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर दोषी संस्थानों और डॉक्टरों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित हो।
यह मामला केवल कानून के पालन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह आम जनता के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ा है। ग्रामीणों को सुरक्षित और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन का निष्पक्ष और त्वरित निर्णय लेना अनिवार्य है। सही समय पर की गई कड़ी कार्रवाई से ही क्षेत्र में फैल रही मेडिकल लापरवाही पर लगाम लगेगी।

