Delhi News: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भारी सैन्य तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच हुई हालिया गोलाबारी के बावजूद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत आने वाले मालवाहक जहाजों की आवाजाही जारी है। पिछले 72 घंटों के भीतर 9 कमर्शियल जहाजों ने इस बेहद संवेदनशील समुद्री मार्ग को सुरक्षित पार किया है।
इन 9 जहाजों में से 7 जहाज भारत के लिए बेहद जरूरी और आवश्यक सामग्री लेकर आ रहे हैं। इस सफल ट्रांजिट के साथ ही इस रणनीतिक जलमार्ग से सुरक्षित गुजरने वाले भारत आने वाले कुल जहाजों की संख्या बढ़कर 44 हो गई है। हाल ही में पार करने वाले जहाजों में 4 भारतीय झंडे वाले हैं।
फारस की खाड़ी में सुरक्षा गारंटी का इंतजार कर रहे 15 जहाज
इसके अलावा भारत आने वाले 15 अन्य बड़े मालवाहक जहाज अभी भी फारस की खाड़ी के पश्चिमी हिस्से में मौजूद हैं। ये सभी जहाज अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों से पुख्ता सुरक्षा गारंटी और पूरी तरह सुरक्षित मार्ग मिलने का इंतजार कर रहे हैं। इन जहाजों में से 10 भारतीय झंडे वाले बड़े वेसल्स हैं।
इन फंसे हुए जहाजों में से 4 जहाजों में कृषि कार्यों के लिए जरूरी उर्वरक लदा हुआ है। वहीं एक अन्य बड़े जहाज में देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कच्चा तेल और गैस भरी हुई है। भारतीय नौसेना का वॉरशिप और विदेश मंत्रालय लगातार इन जहाजों के कप्तानों के संपर्क में हैं।
अमेरिका-ईरान समझौते के बाद जहाजों की रफ्तार में आया उछाल
तनाव के बीच शनिवार को भारतीय झंडे वाला बल्क कैरियर ‘एपीजे प्रीति 2’ करीब 65,000 टन उर्वरक लेकर इस जलडमरूमध्य को पार करने में सफल रहा। इससे ठीक एक दिन पहले शुक्रवार को दो अन्य बड़े जहाजों ने इस रास्ते को पार किया था, जिनमें भारी मात्रा में क्रूड ऑयल था।
शिप ट्रैकर्स के अनुसार 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच एक अहम समझौता साइन होने के बाद भारतीय जहाजों की आवाजाही में भारी उछाल आया है। पिछले मात्र 10 दिनों में ही 25 जहाज इस खतरनाक रास्ते से सुरक्षित निकल चुके हैं, जिससे देश की कृषि और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है।

