वैश्विक विकास में भारत की बड़ी भागीदारी, एस जयशंकर ने सूरीनाम में पेश किए 17% योगदान के आंकड़े

Paramaribo News: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की तेजी से बढ़ती ताकत और वैश्विक अर्थव्यवस्था में इसके प्रभाव का मजबूती से उल्लेख किया है। शुक्रवार को सूरीनाम में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बताया कि वर्तमान में कुल वैश्विक विकास में भारत का योगदान 17 प्रतिशत तक पहुंच गया है। विदेश मंत्री ने विभिन्न सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत आज न केवल अपनी प्रगति कर रहा है, बल्कि दुनिया की आर्थिक स्थिरता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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आईएमएफ के आंकड़ों ने लगाई भारत की प्रगति पर मुहर

अपने संबोधन के दौरान जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के हालिया अनुमानों और आंकड़ों का हवाला दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक मंदी के दौर में भी भारत अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के जोखिम को कम करने में मदद कर रहा है। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत अपने वैश्विक सहयोगियों के लिए विकास के अधिक और बेहतर विकल्प तैयार कर रहा है। बता दें कि जयशंकर वर्तमान में जमैका, सूरीनाम और त्रिनिदाद-टोबैगो की नौ दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं, जहां वे द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत कर रहे हैं।

वैक्सीन वितरण में दुनिया की असमानता पर साधा निशाना

कोविड-19 काल का जिक्र करते हुए एस जयशंकर ने भारत की ‘वैक्सीन कूटनीति’ की सराहना की और मानवीय दृष्टिकोण को सर्वोपरि बताया। उन्होंने उस कठिन दौर में वैक्सीन वितरण में देखी गई वैश्विक असमानता की कड़ी आलोचना की। जयशंकर ने कहा कि जब कुछ विकसित देशों ने अपनी आबादी की जरूरत से आठ गुना ज्यादा वैक्सीन जमा कर ली थी, तब विकासशील देश पीछे छूट गए थे। ऐसे संकट के समय में भारत ने अपनी जिम्मेदारी समझते हुए दुनिया के कई देशों को जीवनरक्षक टीके उपलब्ध कराए थे।

भारत की वैश्विक भूमिका और रणनीतिक स्वायत्तता

विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत की विदेश नीति अब अधिक स्वतंत्र और प्रभावी हो गई है। उन्होंने सूरीनाम में भारतीय मूल के लोगों और स्थानीय प्रतिनिधियों को बताया कि भारत अब केवल एक दर्शक नहीं, बल्कि वैश्विक एजेंडा तय करने वाला देश बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में 17 प्रतिशत का योगदान इस बात का प्रमाण है कि भारत आने वाले समय में विश्व की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बनने की ओर अग्रसर है। उनकी इस यात्रा से कैरेबियाई देशों के साथ भारत के कूटनीतिक संबंध और गहरे होंगे।

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