Uttar Pradesh News: मेरठ में नीट परीक्षा समाप्त होने के बाद छात्र-छात्राओं में मानसिक तनाव का एक बेहद खतरनाक ट्रेंड सामने आया है। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी इस समय भयंकर इमोशनल बर्नआउट, रिजल्ट वेटिंग स्ट्रेस और मेंटल फटीग जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं। मनोचिकित्सकों के पास काउंसलिंग के लिए पहुंचने वाले पीड़ित युवाओं की तादाद लगातार बढ़ रही है।
शहर के शास्त्रीनगर, गढ़ रोड और कंकरखेड़ा इलाकों से डराने वाले मामले सामने आए हैं। परीक्षा खत्म होते ही कई स्टूडेंट्स सोशल मीडिया पर संभावित कटऑफ, रैंक और रिजल्ट की चर्चाएं देखकर डिप्रेशन में चले गए हैं। लगातार बढ़ते फ्यूचर फियर और ओवरथिंकिंग के कारण बच्चों की रात की नींद पूरी तरह गायब हो चुकी है।
लगातार बढ़ता जा रहा है गंभीर मानसिक संकट
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यह केवल परीक्षा का सामान्य तनाव नहीं है। यह उस लंबे मानसिक दबाव का साइड इफेक्ट है, जिसे छात्र पिछले दो साल से कोचिंग, मॉक टेस्ट सीरीज और मेडिकल सीट की अंधी दौड़ के दौरान झेल रहे थे। अब रिजल्ट आने से पहले की अनिश्चितता उनके मन में घबराहट पैदा कर रही है।
यूट्यूब वीडियोज, कटऑफ प्रेडिक्शन और टेलीग्राम ग्रुप्स का डिजिटल ओवरलोड इस संकट को और गंभीर बना रहा है। लगातार सोशल मीडिया के इस्तेमाल से छात्र खुद की तुलना दूसरों से करने लगते हैं। इस कम्पैरिजन ट्रैप की वजह से उनका आत्मविश्वास पूरी तरह क्रैश हो रहा है और वे अकेलापन पसंद कर रहे हैं।
डॉक्टरों के अनुसार इस मानसिक बीमारी के मुख्य लक्षणों में हर समय शरीर में भारी थकान रहना, छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन होना और लोगों से दूरी बनाना शामिल है। इस गंभीर स्थिति से बचने के लिए छात्रों को कुछ दिनों तक इंटरनेट और मोबाइल पर रिजल्ट की फर्जी खबरों से दूरी बना लेनी चाहिए।
प्रसिद्ध काउंसलर डॉ. सोना कौशल गुप्ता और तनिषा अग्रवाल ने बताया कि यह कोई दिमागी कमजोरी नहीं बल्कि लंबे प्रेशर की सामान्य प्रतिक्रिया है। माता-पिता को इस समय बच्चों को डांटने के बजाय उनका साथ देना चाहिए। स्थिति ज्यादा बिगड़ने पर तुरंत अच्छे मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना सबसे सुरक्षित कदम है।
Author: Asha Thakur

