मानसून से पहले नगर निगम के दावों की खुली पोल, शहर में जलभराव की बड़ी आशंका

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Meerut News: मानसून की दस्तक के साथ ही शहर की जलनिकासी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। नगर निगम ने शहर में जलभराव न होने का दावा किया है, लेकिन हकीकत दावों से कोसों दूर है। जून माह में होने वाली नालों की तल्लीझाड़ सफाई का महाअभियान अब तक अधूरा पड़ा है, जिससे बारिश में फिर से मोहल्लों के जलमग्न होने का खतरा बढ़ गया है।

नालों की सफाई में निगम की भारी लापरवाही

हर साल बारिश के मौसम में शहर के तीन दर्जन से अधिक मोहल्ले जलभराव की मार झेलते हैं। निगम का सफाई अभियान केवल कागजों तक सीमित रहता है और नालों के किनारे सिल्ट का अंबार लगा रहता है। हल्की सी बारिश में यह सिल्ट वापस नालों में गिर जाती है, जिससे सड़कों और गलियों में गंदा पानी भर जाता है।

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इन क्षेत्रों में रहता है जलभराव का खतरा

शहर के प्रमुख नाले जैसे ओडियन, आबू नाला, और बच्चा पार्क नाला पूरी तरह गंदगी से अटे पड़े हैं। जलभराव की चपेट में आने वाले इलाकों में खैरनगर, सुभाषनगर, मजीद नगर और समर गार्डन मुख्य रूप से शामिल हैं। इन क्षेत्रों में जलनिकासी के लिए बनी नालियों का लेवल नालों से काफी नीचा है, जो समस्या को और अधिक गंभीर बना देता है।

जलभराव रोकने के लिए ठोस कदम जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट अपनी आधी से कम क्षमता पर चल रहे हैं, जो जलनिकासी में बड़ी बाधा हैं। नालों के ऊपर अतिक्रमण और पुलिया के पास बाटलनेक की सफाई न होना भी जलभराव के प्रमुख कारण हैं। यदि प्रशासन ने समय रहते रेन वाटर हार्वेस्टिंग और तूफानी जल निकासी प्रणाली पर काम नहीं किया, तो हालात खराब होंगे।

अधिकारियों का तर्क और जनता की परेशानी

अपर नगरायुक्त लवी त्रिपाठी का कहना है कि नाले रोजाना दो शिफ्ट में साफ हो रहे हैं और सिल्ट को तुरंत हटाया जा रहा है। इसके विपरीत स्थानीय निवासी रमन का कहना है कि सफाई के बाद सिल्ट कई दिनों तक सड़क किनारे पड़ी रहती है, जो बारिश में वापस नालों में चली जाती है, जिससे उनकी समस्याएं बरकरार रहती हैं।

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