Meerut News: मेरठ शहर में हर साल मानसून के दौरान जलभराव की समस्या से लोगों का जीना मुहाल हो जाता है। नगर निगम प्रशासन हर बार जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने का दावा करता है, लेकिन बारिश होते ही ये दावे खोखले साबित होते हैं। जलभराव के कारण न केवल व्यापार ठप होता है, बल्कि आम नागरिकों का घर से निकलना भी मुश्किल हो जाता है।
शहर के कई मोहल्ले निचले इलाकों में बसे होने के कारण बरसात में डूब जाते हैं। इनमें ओडियन नाला क्षेत्र, बुनकर नगर, इस्लामाबाद, खैरनगर और खत्ता रोड जैसे प्रमुख मोहल्ले शामिल हैं। इन इलाकों में न तो सीवर लाइन की सुविधा है और न ही वर्षा जल संचयन के कोई इंतजाम किए गए हैं, जिससे गंदा पानी वापस कॉलोनियों में घुस जाता है।
कारोबारी गतिविधियों पर पड़ रहा बुरा असर
दिल्ली रोड स्थित मोहकमपुर औद्योगिक क्षेत्र और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में भी भारी जलभराव होता है। यहाँ काम करने वाले व्यापारियों को हर साल लाखों रुपये के माल का नुकसान उठाना पड़ता है। गोदामों में पानी भरने से कारोबारियों की स्थिति बिगड़ जाती है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग स्थायी समाधान निकालने के बजाय सिर्फ औपचारिकताएं पूरी कर रहे हैं।
शहर के वीआईपी इलाके जैसे सिविल लाइन्स, बेगमपुल और बच्चा पार्क भी जलभराव की चपेट से सुरक्षित नहीं हैं। इस बार सीएम ग्रिड योजना के चलते अधिकांश सड़कें खोदी गई हैं, जिससे स्थिति और गंभीर होने की आशंका है। कीचड़ और मलबे के कारण बाजार में चलना दूभर हो गया है, जिससे व्यापारियों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
नाला सफाई के नाम पर लापरवाही
सुभाष नगर से हनुमानपुरी होकर गुजरने वाले नाले की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है। पिछले कई सालों से इस नाले की ठीक से सफाई नहीं हुई है, जिससे पार्षद भी प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। ठेका छोड़ने के बावजूद नाले की सिल्ट पूरी तरह से नहीं निकाली गई है, जिसका खामियाजा पूरे क्षेत्र की जनता को भुगतना पड़ रहा है।
स्थानीय निवासी रामेश्वर बताते हैं कि घर से बाहर निकलना किसी चुनौती से कम नहीं है, इसलिए उन्होंने अपने घरों के रैंप तक ऊंचे करा लिए हैं। वहीं, शरीफ अहमद और चांद मलिक जैसे कारोबारियों का कहना है कि जलभराव के चलते उनका पूरा व्यवसाय ठप हो गया है। जनता अब जल्द से जल्द स्थायी निकासी व्यवस्था और नाला सफाई की मांग कर रही है।

