Bengaluru News: कर्नाटक में नई आबकारी नीति लागू होने के बाद बेंगलुरु में कम अल्कोहल वाली बीयर की मांग में भारी उछाल आया है। राज्य सरकार की नई टैक्स व्यवस्था के कारण हल्की बीयर की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे ग्राहकों को बड़ी राहत मिली है।
अल्कोहल प्रतिशत के आधार पर टैक्स लगने से कीमतें हुईं आधी
कर्नाटक में 11 मई से लागू हुई नई नीति के तहत अब शराब पर टैक्स उसमें मौजूद अल्कोहल की मात्रा के हिसाब से तय किया जा रहा है। इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा उन बीयर ब्रांड्स को मिला है जिनमें अल्कोहल का स्तर 5 प्रतिशत से कम होता है।
कीमतों में कटौती का सबसे बड़ा असर प्रीमियम लेगर बीयर पर पड़ा है। बाजार में 125 रुपये में बिकने वाली 330 मिलीलीटर की प्रीमियम बीयर की बोतल अब घटकर महज 60 रुपये रह गई है। दाम लगभग आधे होने के बाद बेंगलुरु के बाजारों में इसकी बिक्री तेजी से बढ़ रही है।
बीयर की रिकॉर्ड बिक्री से राज्य सरकार के खजाने में आया उछाल
आबकारी विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल से जून) में सिर्फ बीयर की बिक्री से 1,914.81 करोड़ रुपये का राजस्व इकट्ठा हुआ है। यह पिछले साल की इसी अवधि में मिले 1,602.14 करोड़ रुपये के मुकाबले 19.52 प्रतिशत अधिक है।
इस तिमाही में भारतीय निर्मित विदेशी शराब (आईएमएल) की बिक्री से भी सरकार को 8,394.32 करोड़ रुपये की कमाई हुई है। विभाग ने पहली तिमाही में कुल 10,599.29 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल किया है, जो पिछले साल के मुकाबले 14.39 प्रतिशत की समग्र बढ़ोतरी को दर्शाता है।
प्रीमियम और स्थानीय क्राफ्ट बीयर सेगमेंट को मिला जबरदस्त फायदा
शराब कारोबारियों के अनुसार, टैक्स में बदलाव का फैसला बिल्कुल सही समय पर लागू हुआ क्योंकि गर्मियों के मौसम में बीयर की खपत स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। बाजार में इस समय किंगफिशर, बडवाइज़र, कोरोना और होगार्डन जैसे प्रीमियम अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स की मांग लगातार बनी हुई है।
इसके साथ ही बेंगलुरु की स्थानीय क्राफ्ट ब्रुअरीज की व्हीट बीयर, लेगर और स्टाउट को भी ग्राहक काफी पसंद कर रहे हैं। रिटेलर्स का कहना है कि कम कीमत और कम अल्कोहल के बेहतरीन कॉम्बिनेशन ने ग्राहकों को आकर्षित किया है, जिससे लेगर बीयर सेगमेंट को सबसे बड़ा फायदा पहुंचा है।

