New Delhi News: पेट्रोलियम मंत्रालय ने इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को लेकर चल रही चर्चाओं पर एक विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। मंत्रालय ने साफ किया कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की यह पहल मौजूदा सरकार के समय शुरू नहीं हुई थी, बल्कि इसका दो दशकों से ज्यादा का एक लंबा संस्थागत इतिहास और सफर रहा है।
पायलट प्रोजेक्ट से लेकर नीतिगत बदलावों तक ऐसा रहा पूरा सफर
आधिकारिक बयान के अनुसार, साल 2001 में एक पायलट इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम की शुरुआत की गई थी। इसके बाद 2004 में इसकी औपचारिक घोषणा हुई और 2006 तक कई राज्यों में 5 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग (E5) को लागू कर दिया गया था। जनवरी 2013 में यूपीए सरकार के दौरान गैजेट ऑफ इंडिया में इसके पॉलिसी फ्रेमवर्क को अधिसूचित किया गया था।
मंत्रालय ने बताया कि इन प्रयासों के बावजूद साल 2014 तक देश में ब्लेंडिंग का स्तर महज 1.5 प्रतिशत पर ही अटका रहा। उस समय भारत इथेनॉल उत्पादन के लिए पूरी तरह से गन्ने पर निर्भर था, जिसकी सालाना क्षमता लगभग 400 करोड़ लीटर थी। यह क्षमता मामूली लक्ष्यों को पूरा करने के लिए भी नाकाफी थी।
मई 2018 में जैव-ईंधन नीति लागू होने से आया बड़ा बदलाव
उत्पादन की कमी को दूर करने के लिए सरकार ने मई 2018 में ‘नेशनल पॉलिसी ऑन बायोफ्यूल्स’ (जैव-ईंधन पर राष्ट्रीय नीति) की शुरुआत की। इसके बाद यह पेट्रोलियम, खाद्य, सड़क परिवहन, भारी उद्योग और रेलवे जैसे कई मंत्रालयों का एक संयुक्त ‘होल-ऑफ-गवर्नमेंट’ मिशन बन गया। सभी विभागों ने मिलकर एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार किया।
निवेश बढ़ाने के लिए अगस्त 2021 में तेल विपणन कंपनियों (IOCL, BPCL और HPCL) ने इथेनॉल की कमी वाले क्षेत्रों में विशेष प्लांट लगाने के लिए रुचि की अभिव्यक्ति (ईओआई) जारी की। इन परियोजनाओं को बैंकों के साथ तीन-तरफा फाइनेंसिंग व्यवस्था और दीर्घकालिक खरीद समझौतों के जरिए सुरक्षित किया गया, जिससे निवेश का जोखिम बेहद कम हो गया।
ऑटोमोबाइल कंपनियों ने फील्ड टेस्टिंग में ई20 ईंधन को माना पूरी तरह सुरक्षित
जून 2021 में नीति आयोग ने सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ लंबी चर्चा के बाद इथेनॉल ब्लेंडिंग का एक विस्तृत रोडमैप जारी किया। मंत्रालय ने ‘जल्दबाजी’ के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि E10 से E20 इथेनॉल ब्लेंडिंग में बदलाव किसी अंदाजे पर नहीं, बल्कि कई सालों की टेस्टिंग और मैकेनिज्म पर आधारित था।
देश की बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों मारुति सुजुकी और हीरो मोटोकॉर्प ने फील्ड से मिले वास्तविक आंकड़ों के आधार पर पुष्टि की है कि E20 ईंधन के इस्तेमाल से गाड़ियों के इंजन में जंग लगने, असामान्य घिसाव या पुर्जों के खराब होने जैसी कोई समस्या नहीं देखी गई है। सरकार ने ग्राहकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक जानकारियों से पूरी तरह दूर रहें।

