New Delhi: राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने मरीजों के हक में एक बड़ा फैसला सुनाया है। दवा नियामक ने डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों की 39 आवश्यक दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत निर्धारित कर दी है। सरकार ने बाजार में मनमानी कीमतों पर रोक लगाने के लिए यह कदम उठाया है।
दवा नियामक संस्था ने यह महत्वपूर्ण आदेश 8 जुलाई 2026 को ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर के तहत जारी किया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य जीवनरक्षक और जरूरी दवाओं को आम जनता के बजट में रखना है। इस फैसले के बाद दवा बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और कंपनियों की मनमानी पर तुरंत लगाम लगेगी।
कैल्शियम और एंटी-रेबीज इंजेक्शन के दामों में हुआ बदलाव
नियामक संस्था ने कैल्शियम और विटामिन डी3 कॉम्बिनेशन टैबलेट की अधिकतम खुदरा कीमत अब 8.93 रुपये प्रति टैबलेट तय की है। यह दवा हड्डियों की मजबूती के लिए बेहद जरूरी मानी जाती है। नई दरें लागू होने से देश के करोड़ों मरीजों के साथ-साथ अस्पतालों को भी सीधा आर्थिक लाभ मिलने की पूरी उम्मीद है।
इसके साथ ही एंटी-रेबीज इम्युनोग्लोब्युलिन इंजेक्शन की खुदरा कीमत को संशोधित कर 119.48 रुपये किया गया है। यह जीवनरक्षक इंजेक्शन कुत्ता या बंदर काटने के बाद रेबीज संक्रमण से बचाव के लिए लगाया जाता है। उत्पादन लागत और बाजार में उपलब्धता को देखते हुए इस कीमत में थोड़ा बदलाव किया गया है।
इन महत्वपूर्ण कॉम्बिनेशन दवाओं की कीमतें हुईं नियंत्रित
सरकार द्वारा जारी इस नई सूची में कई आवश्यक साल्ट और कॉम्बिनेशन शामिल हैं। इनमें मुख्य रूप से एमलोडिपाइन, टेल्मिसार्टन, एस्पिरिन, अटोर्वास्टेटिन और एमोक्सिसिलिन जैसी दवाएं शामिल हैं। ये सभी साल्ट मुख्य रूप से ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने, कोलेस्ट्रॉल घटाने, इंफेक्शन रोकने और दिल का दौरा पड़ने से बचाने में काम आते हैं।
लाखों मरीज इन दवाओं का नियमित सेवन करते हैं, इसलिए यह नियंत्रण उनके लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा। दवा नियामक ने सभी निर्माता कंपनियों, आयातकों और खुदरा विक्रेताओं को ये नियम तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए हैं। अब कंपनियों को नए पैकेट पर संशोधित मूल्य ही छापना होगा।

