Kurukshetra News: पहाड़ों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश का कहर अब हरियाणा के मैदानी इलाकों में भी साफ दिखने लगा है। कुरुक्षेत्र जिले के शाहाबाद में बहने वाली मारकंडा नदी का जलस्तर अचानक तेजी से बढ़ गया है, जिससे नदी में 14000 क्यूसिक से ज्यादा पानी आ चुका है।
इस अचानक आई बाढ़ की वजह से ऐतिहासिक गांव कठवा सहित दो से तीन नजदीकी गांव पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। पानी का बहाव इतना तेज है कि इन गांवों का एक-दूसरे से और जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह से टूट गया है, जिससे आपातकालीन स्थिति पैदा हो गई है।
मानसून की पहली बारिश में डूबीं गांव की सड़कें
बाढ़ के पानी के कारण गांव कठवा की मुख्य संपर्क सड़कें पूरी तरह पानी में डूब चुकी हैं। इस भारी जलभराव की वजह से किसानों की कई हजार एकड़ में लहलहाती फसल जलमग्न होकर पूरी तरह बर्बाद हो गई है। स्थानीय प्रशासन ने मानसून से पहले बाढ़ से निपटने के पुख्ता इंतजाम करने के बड़े-बड़े दावे किए थे।
प्रशासन का दावा था कि इस बार किसी भी गांव को पानी से कोई नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। लेकिन मानसून की इस पहली ही तेज बारिश ने प्रशासनिक दावों की जमीनी हकीकत की पूरी तरह पोल खोलकर रख दी है। हर साल की तरह इस बार भी गांव की गलियां और सड़कें तालाब बन चुकी हैं।
धरातल पर फेल हुए दावे, प्रशासन पर भड़के ग्रामीण
बाढ़ की इस भयावह स्थिति ने कुरुक्षेत्र प्रशासन की प्री-मानसून तैयारियों को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। हकीकत दावों के ठीक उलट निकलने से गांव कठवा इस समय पूरी तरह एक टापू में तब्दील नजर आ रहा है। बुनियादी सुविधाएं ठप होने से ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।
पीड़ित ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि हर साल सरकार और प्रशासनिक अधिकारी बाढ़ से बचाने के खोखले वादे करते हैं, लेकिन धरातल पर कोई ठोस काम नहीं किया जाता। ग्रामीणों ने कहा कि हर वर्ष उन्हें इसी तरह भारी आर्थिक नुकसान और असहनीय मानसिक प्रताड़ना झेलने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

