Punjab News: राज्य सरकार ने यूरिया सब्सिडी में हुई कथित धांधली को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। तकनीकी ग्रेड यूरिया के नाम पर कृषि उपयोग वाले नीम-कोटेड यूरिया की सप्लाई के मामले में सात अधिकारियों को चार्जशीट किया गया है। साथ ही जांच का दायरा बढ़ाकर अब दिल्ली और हरियाणा तक फैला दिया गया है ताकि दोषी बख्शे न जाएं।
सहकारिता विभाग ने बीते 25 जून को इन भ्रष्ट गतिविधियों में शामिल अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच के निर्देश जारी किए थे। मार्कफेड और मिल्कफेड को खरीद व सप्लाई प्रक्रिया में हुई भारी अनियमितताओं के सबूत मिले हैं। इन सरकारी संस्थानों ने संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए उनके खिलाफ सख्त पेनल्टी कार्रवाई शुरू कर दी है।
मिल्कफेड और मार्कफेड के अधिकारी घेरे में
मिल्कफेड ने खन्ना स्थित कैटल फीड प्लांट के जनरल मैनेजर, क्वालिटी इंचार्ज और परचेज स्टोर के डिप्टी मैनेजर समेत कई अन्य जिम्मेदारों को मेजर पेनल्टी चार्जशीट जारी की है। मार्कफेड ने भी अपनी प्राथमिक जांच में दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला शुरू कर दिया है। इनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
इस पूरे घोटाले में दिल्ली की मनीषा ट्रेडिंग कंपनी और सोनीपत की एएम केमिकल कंपनी की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। इन कंपनियों के साथ मिलकर सरकारी फंड का गलत इस्तेमाल करने का आरोप है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को किसी भी हाल में छोड़ा नहीं जाएगा।
टैक्सेशन विभाग द्वारा की जा रही जांच
वित्तीय गड़बड़ी और जीएसटी चोरी की आशंका के मद्देनजर राज्य के टैक्सेशन विभाग ने भी मामले की जांच तेज कर दी है। गिद्दड़बाहा स्थित इंडो ऑर्गेनिक कंपनी के कार्यालय का निरीक्षण कर सभी दस्तावेज व रिकॉर्ड जब्त कर लिए गए हैं। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरी साजिश का नेटवर्क और कितना गहरा है।
अधिकारियों का एक बड़ा वर्ग अब इस कानूनी कार्रवाई के दायरे में है। विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ अब अन्य व्यावसायिक संपर्कों की भी बारीकी से पड़ताल की जा रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे हो सकते हैं, जिससे इस यूरिया घोटाले के सभी चेहरों को बेनकाब किया जा सके।

