India News: भारत में खतरनाक उमस भरी गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। क्लाइमेट सेंट्रल की एक नई वैश्विक अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, देश में भीषण उमस वाले दिनों की संख्या में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। पसीने के जरिए शरीर को ठंडा रखने की क्षमता कम होने से मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे उत्पन्न हो गए हैं।
खतरनाक उमस भरी गर्मी के आंकड़ों का विश्लेषण
अध्ययन में वेट-बल्ब तापमान को आधार बनाया गया है। इसमें 25 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक वाले दिनों को खतरनाक माना गया है। 1970 के दशक में भारत में ऐसे औसतन 101 दिन होते थे, जो 2016-25 के दौरान बढ़कर 141 दिन हो गए हैं। वैश्विक स्तर पर भी उमस वाले दिनों की औसत संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है।
देश के प्रमुख शहरों में उमस का कहर
दिल्ली में खतरनाक गर्मी के दिनों की संख्या 96 से बढ़कर 135 हो गई है। मुंबई में यह आंकड़ा 136 से बढ़कर 206 और चेन्नई में 205 से बढ़कर 257 दिनों तक पहुंच गया है। सबसे अधिक प्रभावित शहर तमिलनाडु का तिरुनेलवेली रहा, जहां उमस भरे दिनों की संख्या 119 से बढ़कर 273 तक दर्ज की गई है।
मानव जनित जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य जोखिम
क्लाइमेट सेंट्रल के शोधकर्ताओं ने इस वृद्धि का मुख्य कारण मानव जनित जलवायु संकट को माना है। डॉ. लिसा पटेल के अनुसार, यह स्थिति सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और उन लोगों के लिए जोखिम अधिक है, जिनके पास कूलिंग की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
उमस के दौरान शरीर की तापमान नियंत्रित करने की प्राकृतिक प्रक्रिया बाधित हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप, कम तापमान में भी गर्मी का अनुभव जानलेवा हो सकता है। यह अध्ययन चेतावनी देता है कि यदि वैश्विक तापमान इसी तरह बढ़ता रहा, तो आने वाले वर्षों में जीवन के लिए खतरा और भी बढ़ सकता है। सरकार और नागरिकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।

