प्रयागराज में मोबाइल लॉक खुलवाने के नाम पर बड़ा सुरक्षा जोखिम, बिना वेरिफिकेशन के खुल रहे चोरी के फोन

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Prayagraj News: प्रयागराज में मोबाइल चोरी और गुम होने के मामले हर दिन बढ़ रहे हैं। शहर की रिपेयरिंग दुकानों पर किए गए रियलिटी चेक में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। कई दुकानों पर बिना किसी पहचान पत्र या बिल के ही मोबाइल का लॉक आसानी से खोला जा रहा है, जो सुरक्षा के लिहाज से बहुत बड़ी लापरवाही है।

बिना आईडी प्रूफ लॉक खोलने का खतरा

हमारे रिपोर्टर ने सिविल लाइंस, जॉनसनगंज और कटरा समेत कई इलाकों की 24 से अधिक मोबाइल शॉप्स पर रियलिटी चेक किया। इस दौरान कई दुकानदारों ने केवल औपचारिक पूछताछ के बाद लॉक खोलने की सहमति दे दी। उनसे फोन का मालिकाना हक साबित करने वाला कोई जरूरी दस्तावेज या पहचान पत्र नहीं मांगा गया, जो साइबर सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।

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मॉडल के हिसाब से वसूली जा रही कीमत

मोबाइल लॉक अनलॉक करने के लिए दुकानदारों ने अलग-अलग चार्ज की मांग की। कुछ ने तो मॉडल की जटिलता के आधार पर 1000 से 1500 रुपये तक मांगे, जबकि सामान्य लॉक के लिए 500 से 700 रुपये का खर्च बताया गया। यह प्रक्रिया किसी तय नियम के बिना मनमाने तरीके से चल रही है, जिससे चोरी के फोन को अनलॉक करना आसान हो गया है।

कुछ दुकानदार नियमों को लेकर हैं सतर्क

सभी जगह स्थिति एक जैसी नहीं थी। रियलिटी चेक में कुछ जिम्मेदार दुकानदारों ने बिना बिल या मालिक की आईडी के फोन खोलने से साफ मना कर दिया। ऐसे दुकानदारों ने ग्राहकों को सीधे आधिकारिक सर्विस सेंटर जाने की सलाह दी। उनका मानना है कि बिना ओनरशिप जांचे किसी भी डिवाइस का सॉफ्टवेयर अनलॉक करना जोखिम भरा और गलत कार्य है।

चोरी के फोन से डेटा चोरी का डर

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार प्रयागराज में हर दिन औसतन 10 से 15 मोबाइल गुम या चोरी होने की शिकायतें दर्ज होती हैं। यदि इन चोरियों के बाद फोन का लॉक बिना वेरिफिकेशन के खुल जाता है, तो चोरों के लिए निजी फोटो, बैंकिंग डेटा और कॉन्टैक्ट लिस्ट तक पहुंचना बहुत आसान हो जाता है। डिजिटल युग में मोबाइल का दुरुपयोग बड़ी मुसीबत बन सकता है।

सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाएं

मोबाइल चोरी या गुम होने पर तुरंत एफआईआर दर्ज करानी चाहिए और अपने डिवाइस को आधिकारिक तौर पर ब्लॉक करना चाहिए। रिपेयरिंग दुकान संचालकों को भी यह समझना चाहिए कि ग्राहक की समस्या हल करने के साथ ओनरशिप की जांच करना उनकी सामाजिक जिम्मेदारी है। बिना उचित कागजात के लॉक खोलना कानूनी कार्रवाई का आधार भी बन सकता है।

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