Shimla News: हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (HRTC) में चालकों की अस्थायी भर्ती को लेकर अब प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। कर्मचारी यूनियन की हड़ताल की चेतावनी के बीच शुरू हुई इस भर्ती प्रक्रिया का छात्र संगठनों ने विरोध किया है।
चुनावी वादों से मुकर रही सरकार: एबीवीपी
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने इस पूरी प्रक्रिया को प्रदेश के युवाओं के साथ बड़ा धोखा करार दिया है। संगठन का आरोप है कि कांग्रेस ने चुनावों के समय युवाओं को स्थायी नौकरियां देने का बड़ा वादा किया था।
एबीवीपी के प्रदेश सह मंत्री भवानी ठाकुर ने बुधवार को कहा कि सरकार अब अपने वादों से पीछे हट रही है। सरकार नियमित रोजगार देने के बजाय दैनिक वेतन पर नियुक्तियां कर रही है। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं में गहरी निराशा है।
उन्होंने कहा कि युवा लंबे समय तक सरकारी नौकरियों के लिए मेहनत करते हैं। उन्हें उम्मीद होती है कि उन्हें एक सुरक्षित भविष्य मिलेगा। लेकिन निगम प्रबंधन का 1500 रुपये दिहाड़ी पर अस्थायी चालक रखने का फैसला छात्र हितों के खिलाफ है।
रिक्त पदों पर नियमित भर्ती करने की उठी मांग
विद्यार्थी परिषद ने सवाल उठाया कि जब घोषणा पत्र में स्थायी रोजगार की गारंटी दी गई थी, तो अब ऐसी नीतियां क्यों लाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि जमीनी हकीकत और दावों में बड़ा अंतर होने से राज्य का युवा ठगा महसूस कर रहा है।
संगठन ने मांग की है कि 31 डिपुओं में 656 पदों पर होने वाले साक्षात्कारों को तुरंत रद्द किया जाए। इसके स्थान पर लोक सेवा आयोग के माध्यम से नियमित और पारदर्शी चयन प्रक्रिया शुरू कर बेरोजगारों को समान अवसर दिए जाएं।
मांगें न मानने पर राज्यव्यापी आंदोलन की बड़ी चेतावनी
एबीवीपी ने सुक्खू सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि युवाओं की इस जायज मांग को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो संगठन चुप नहीं बैठेगा। परिषद इसके विरोध में जल्द ही पूरे प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से बड़ा आंदोलन शुरू करेगी।
इस बीच, एचआरटीसी प्रबंधन का कहना है कि यह केवल एक आपातकालीन व्यवस्था है ताकि हड़ताल के दौरान आम जनता को असुविधा न हो। अधिकारियों के अनुसार इंटरव्यू की प्रक्रिया पारदर्शी है और योग्य चालकों को प्राथमिकता मिल रही है।

