Shimla News: हिमाचल प्रदेश के 21 आयुर्वेदिक अस्पतालों को आयुष्मान भारत और हिमकेयर योजना से डी-एम्पैनल (बाहर) कर दिया गया है। राज्य सरकार के इस बड़े फैसले के बाद प्रदेश की सियासत पूरी तरह गरमा गई है और विपक्षी दल हमलावर है।
भाजपा ने फैसले को बताया गरीब विरोधी
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सरकार के इस कदम को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, जनविरोधी और गरीब विरोधी करार दिया है। प्रदेश भाजपा के मुख्य प्रवक्ता राकेश जम्वाल ने बुधवार को जारी एक कड़े बयान में सुक्खू सरकार पर तीखे राजनीतिक बाण चलाए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार अब आम जनता को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं से पूरी तरह वंचित कर रही है। आधिकारिक आदेश के मुताबिक इन 21 आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में दोनों बड़ी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत मिलने वाला मुफ्त इलाज पूरी तरह बंद हो गया है।
इस फैसले से राज्य के हजारों गरीब मरीजों, किसानों, खेतिहर मजदूरों, बुजुर्गों और दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सीधा नुकसान होगा। यह सभी वर्ग अपनी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मुख्य रूप से इन्हीं योजनाओं पर निर्भर थे।
जनकल्याणकारी योजनाओं को कमजोर करने का आरोप
राकेश जम्वाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सत्ता संभालने के बाद से ही केवल जनहित के संस्थानों को बंद करने का काम किया है। सरकार लगातार विकास कार्यों को रोक रही है और पहले से चल रही कल्याणकारी योजनाओं को कमजोर कर रही है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना देश के करोड़ों गरीब नागरिकों के लिए एक बड़ा वरदान साबित हुई है। लेकिन प्रदेश सरकार की प्रशासनिक अक्षमता और घोर उदासीनता के कारण हिमाचल के लोगों को इसका समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
भाजपा प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी कौन सी बड़ी मजबूरी थी जिसके कारण एक साथ इतने अस्पतालों में सुविधाएं रोकनी पड़ीं। उन्होंने कहा कि सूबे में पहले से ही पैरामेडिकल स्टाफ, डॉक्टरों और अन्य तकनीकी कर्मचारियों के सैकड़ों पद खाली चल रहे हैं।
सुक्खू सरकार से तुरंत समीक्षा करने की मांग
विपक्षी दल ने मांग की है कि प्रदेश सरकार जनहित में तुरंत अपने इस तानाशाही निर्णय की कानूनी समीक्षा करे। उन्होंने इन सभी प्रभावित आयुर्वेदिक संस्थानों में आयुष्मान भारत और हिमकेयर के तहत मिलने वाले सभी लाभों को तुरंत बहाल करने की बात कही।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मॉनसून सीजन से ठीक पहले स्वास्थ्य सुविधाओं में कटौती का यह मुद्दा आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है। अब देखना यह है कि इस चौतरफा दबाव के बाद स्वास्थ्य विभाग क्या कदम उठाता है।

