बंगाल में बदली राजनीतिक हवा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ने के लिए युवाओं और आम लोगों में होड़

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West Bengal News: बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही वहां का सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। अब राज्य में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ने वाले लोगों की संख्या में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। संघ के कार्यालयों और शाखाओं में सदस्यता लेने के लिए लोगों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं।

ऑनलाइन आवेदनों में हुई पांच गुना वृद्धि

संघ के आंकड़ों के मुताबिक, केवल पिछले एक महीने के भीतर बंगाल से एक लाख से ज्यादा ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए हैं। यह आंकड़ा पहले की तुलना में करीब पांच गुना अधिक है। पहले जहां महीने में औसतन बीस हजार आवेदन मिलते थे, वहीं अब यह संख्या एक लाख तक पहुंच गई है, जो राज्य में बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।

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पुराने डर के साये से बाहर निकले लोग

स्थानीय लोगों का मानना है कि पिछली सरकारों के दौरान संघ से जुड़ने पर उन्हें डराया-धमकाया जाता था। भारतीय राष्ट्रवाद की भूमि माने जाने वाले बंगाल में वैचारिक स्वतंत्रता पर कई दशकों तक अंकुश था। हालांकि, अब सरकार बदलने के बाद लोगों में राष्ट्रभक्ति का भाव खुलकर सामने आ रहा है और वे बिना किसी डर के संघ से जुड़ रहे हैं।

पूरे देश में संघ का तेज विस्तार

राष्ट्रीय स्तर पर भी पिछले 12 वर्षों में संघ का विस्तार बहुत तेजी से हुआ है। मार्च 2013 में पूरे देश में लगभग 42,981 शाखाएं लगती थीं, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 88,949 हो गई हैं। आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान संघ की शाखाओं की संख्या में 107 प्रतिशत की बड़ी बढ़ोतरी हुई है। हर दिन करीब दस नई शाखाएं खुल रही हैं।

स्वयंसेवी संगठन के रूप में बढ़ता आधार

पिछले एक साल के आंकड़ों पर गौर करें तो पूरे भारत में 5,820 नई शाखाएं शुरू हुई हैं। संघ की पहुंच 3,943 नए स्थानों तक हुई है। भले ही सदस्यों का कोई आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं है, लेकिन शाखाओं के अनुपात में सदस्यों की संख्या में भी भारी वृद्धि हुई है। बंगाल में आए इस बदलाव से संघ का आधार और भी मजबूत होगा।

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