Delhi News: क्या आपकी सुबह भी रोज की भागदौड़ और मानसिक तनाव के साथ शुरू होती है? जल्दी-जल्दी उठकर काम के लिए तैयार होना, जल्दबाजी में नाश्ता बनाना और फिर उसे फटाफट खाकर ऑफिस के लिए निकल जाना आजकल ज्यादातर लोगों की लाइफस्टाइल का एक अहम हिस्सा बन चुका है।
ऐसे खराब रूटीन में अपनी सेहत का सही ध्यान रखना बेहद मुश्किल हो जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, अगर आप शरीर और मन दोनों को हमेशा स्वस्थ और संतुलित रखना चाहते हैं, तो अपनी रोजमर्रा की आदतों में कुछ बहुत ही आसान और अच्छी चीजों को शामिल करना जरूरी है।
प्रकृति के नियमों के साथ तालमेल बिठाती है ‘दिनचर्या’
आजकल जिसे हम अपनी डेली लाइफ का रूटीन कहते हैं, आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों में उसे ‘दिनचर्या’ का नाम दिया गया है। आयुर्वेद का स्पष्ट मानना है कि पूरी तरह स्वस्थ रहने के लिए हमारी जीवनशैली का तालमेल हमेशा प्रकृति के नियमों के साथ बिल्कुल सटीक होना चाहिए।
सही समय पर सोना, सुबह जल्दी जागना, सही वक्त पर खाना खाना और पर्याप्त आराम करना शरीर व मन को कई गंभीर बीमारियों से बचाता है। अगर हम प्रकृति के चक्र के अनुसार अपने शरीर को ढाल लेते हैं, तो मानसिक और शारीरिक परेशानियां खुद-ब-खुद दूर होने लगती हैं।
स्वस्थ जीवन के लिए आयुर्वेद सबसे पहले सूर्योदय से कुछ समय पहले उठने की सलाह देता है। सुबह का शांत और शुद्ध माहौल शरीर को नई एनर्जी से भर देता है। बिस्तर छोड़ने के बाद सबसे पहला काम दांतों और जीभ की अच्छी तरह सफाई करना होना चाहिए।
गुनगुना पानी, योग और ऑयल मसाज से शरीर को मिलेगी ताकत
मुंह साफ करने के बाद सुबह एक या दो गिलास गुनगुना पानी पीना बेहद फायदेमंद माना जाता है। आप चाहें तो अपनी पसंद के अनुसार इसमें थोड़ा नींबू, शहद या अदरक का रस भी मिला सकते हैं। यह बॉडी को डिटॉक्स करने और डाइजेशन को सुधारने का काम करता है।
इसके बाद रोजाना कुछ समय योग, प्राणायाम या हल्की एक्सरसाइज के लिए जरूर निकालें। इससे पूरे दिन शरीर में गजब की ऊर्जा बनी रहती है और मन भी शांत रहता है। एक्सरसाइज के बाद शुद्ध तेल से शरीर और बालों की हल्की मालिश करना त्वचा को बेहतरीन पोषण देता है।
आयुर्वेद के नियमों के अनुसार तेल मालिश के कुछ समय बाद किया गया स्नान (नहाना) शरीर को गजब की ताजगी और आराम देता है। इसके बाद सुबह का नाश्ता हमेशा पौष्टिक और हल्का होना चाहिए, जो आसानी से पच जाए और आपको लंबे समय तक एक्टिव रखे।
दोपहर और रात के भोजन के लिए आयुर्वेद का सटीक टाइम टेबल
आयुर्वेद के अनुसार, दोपहर का भोजन हमेशा समय पर करना बहुत जरूरी है। कोशिश करें कि दोपहर का खाना 12 से 1 बजे के बीच हर हाल में खा लें, क्योंकि इस समय सूर्य की स्थिति के कारण हमारे शरीर का पाचन तंत्र (जठराग्नि) सबसे तेज और बेहतर तरीके से काम करता है।
दोपहर का खाना खाने के बाद थोड़ी देर आराम करना फायदेमंद होता है। लेकिन जिन लोगों को कफ या मोटापे की समस्या है, उन्हें दोपहर में ज्यादा देर सोने से बचना चाहिए। शाम के समय काम से लौटकर थोड़ा आराम करना और मेडिटेशन (ध्यान) करना दिमाग को शांत करता है।
रात का खाना हमेशा हल्का होना चाहिए और इसे शाम 7 बजे तक खा लेना सबसे बेहतर माना जाता है। कोशिश करें कि सोने से करीब 2-3 घंटे पहले आपका डिनर पूरा हो जाए। इन आसान नियमों को अपनाकर आप बिना किसी दवा के हमेशा पूरी तरह फिट और एनर्जेटिक रह सकते हैं।

