हिमाचल में दिल्ली से हेली टैक्सी सेवा शुरू होने से पहले ही अड़चन, दो बड़ी कंपनियों ने खड़े किए हाथ, मंत्रालय को दी जानकारी

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Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश में हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। राज्य में हेली टैक्सी सुविधा दे रही दो प्रमुख विमानन कंपनियों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। कंपनियों ने दिल्ली से सीधे यह सर्विस शुरू करने में पूरी तरह असमर्थता जताई है।

पवन हंस और हेरीटेज एविएशन ने इस संबंध में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय को लेटर भेजकर सूचित कर दिया है। कंपनियों का कहना है कि वे दिल्ली रूट के लिए बड़ा हेलीकाप्टर उपलब्ध नहीं करवा सकती हैं। इसके पीछे उन्होंने यात्रियों की कमी और भारी आर्थिक नुकसान का तर्क दिया है।

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जानिए विमानन कंपनियों ने मंत्रालय को क्या तर्क दिए हैं

दोनों एविएशन कंपनियों ने मंत्रालय को बताया कि बड़े हेलीकाप्टर की सीट क्षमता के अनुसार उनके पास रेगुलर पैसेंजर्स उपलब्ध नहीं हैं। देश में इस समय केवल स्काई वन कंपनी के पास ही 24 सीटर बड़ा हेलीकाप्टर उपलब्ध है। ऐसे में अन्य रूट्स पर बड़ा विमान चलाना घाटे का सौदा होगा।

कंपनियों ने यह भी साफ किया है कि बड़े हेलीकाप्टर का ऑपरेशनल कॉस्ट बहुत ज्यादा होता है। इस वजह से हवाई सफर का टिकट शुल्क भी डेढ़ गुना से अधिक बढ़ सकता है। इतना महंगा टिकट होने के बाद आम पर्यटकों के लिए इस सर्विस का लाभ उठाना बहुत मुश्किल हो जाएगा।

संजौली से रिकांगपिओ और भुंतर के लिए नियमित उड़ानें

वर्तमान में ये दोनों कंपनियां शिमला के संजौली हेलीपोर्ट से जनजातीय जिले किन्नौर के रिकांगपिओ और कुल्लू के भुंतर के लिए हेली टैक्सी सर्विस ऑपरेट कर रही हैं। करीब डेढ़ महीने तक तकनीकी कारणों से बंद रहने के बाद बीते 6 जून से यह हवाई सेवा फिर से बहाल हुई है।

मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने इसी साल इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की थी। फिलहाल चार सीटों वाले छोटे हेलीकाप्टर में केवल दो यात्रियों को लेकर उड़ान भरने का नियम लागू है। कंपनियाँ इस समय न्यूनतम ऑक्युपेसी के साथ ही अपनी फ्लाइट्स का संचालन ग्रामीण इलाकों में कर रही हैं।

सर्विस को मुनाफे में लाने के लिए रूट बढ़ाने की मांग

इस बीच हेली टैक्सी कंपनियों ने राज्य सरकार और नागरिक उड्डयन मंत्रालय से अन्य नए टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स को भी इस एयर नेटवर्क से जोड़ने की मांग की है। उनका मानना है कि नए रूट्स मिलने से ही इस पूरे प्रोजेक्ट को आर्थिक रूप से मुनाफे में लाया जा सकेगा।

मंत्रालय अब कंपनियों के इस फीडबैक के बाद नए विकल्पों पर विचार कर रहा है। दिल्ली से डायरेक्ट कनेक्टिविटी न होने से बाहरी राज्यों से आने वाले वीआईपी और पर्यटकों को थोड़ी निराशा जरूर होगी। सरकार अब इस डेडलॉक को तोड़ने के लिए बीच का रास्ता निकालने की कोशिश में जुटी है।

Reported By: Sunita Gupta

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