फरीदाबाद: सेक्टर-8 थाने के मालखाने से 32 हथियार चोरी का मामला, 13 आरोपियों की जमानत याचिका खारिज

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Faridabad News: हरियाणा के फरीदाबाद जिले के सेक्टर-8 थाने के मालखाने से 32 सरकारी व जब्तशुदा हथियार चोरी होने के हाई-प्रोफाइल मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। इस सनसनीखेज वारदात के 14 आरोपियों ने कोर्ट में जमानत की गुहार लगाई थी, जिसमें से अदालत ने 13 आरोपियों की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है।

अदालत ने मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए साफ कहा कि ऐसे संगीन अपराध में आरोपियों को जमानत का लाभ कतई नहीं दिया जा सकता। इस मामले में अब तक केशव चौधरी, मोहम्मद तालीम, विपिन कुमार, अमित कुमार, सचिन, संजय सुनारिया, अमन, आशीष, दीपक, भगवान सिंह, अंकित गर्ग, पुष्पेंद्र, अजय कुमार और पवन कुमार ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

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इन सभी 14 याचिकाकर्ताओं में से अदालत ने अब तक केवल एक आरोपी पवन कुमार की जमानत मंजूर की है। पवन कुमार पर आरोप था कि उसने मुख्य आरोपी संजय सुनारिया के साथ मिलकर दो पिस्टल आगे राहुल और बलवान नाम के व्यक्तियों को बेची थीं, जिसके बदले में उसे कमीशन मिला था।

इस सौदेबाजी के लिए पवन को 15 हजार रुपये का कमीशन मिला था, जिसमें से पुलिस ने 35 सौ रुपये की नकदी पहले ही बरामद कर ली है। सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि इस पूरे नेटवर्क में शामिल किसी अन्य सह-आरोपी के बयान में पवन का सीधा नाम या बड़ी भूमिका सामने नहीं आई है, जिसके बाद कोर्ट ने उसे राहत दे दी।

आईटीआई छात्र ने उड़ाए थे हथियार, कमीशन पर आगे बनती गई लंबी चेन

पुलिस ने अदालत के समक्ष मामले का पूरा ब्योरा पेश करते हुए बताया कि सेक्टर-8 थाने में अप्रेंटिसशिप (ट्रेनिंग) के लिए आए आईटीआई के एक छात्र मोनू ने मुख्य रूप से मालखाने से इन 32 हथियारों को चोरी किया था। मोनू ने इसमें से 26 हथियार सीधे संजय सुनारिया को बेहद कम दामों में बेच दिए थे।

हथियार हाथ लगते ही संजय सुनारिया ने इस अवैध धंधे की एक लंबी चेन बना डाली। संजय ने 16 हथियार प्रदीप को, तीन केशव को और बलवान व राहुल को एक-एक हथियार बेच दिया, जबकि बाकी बचे असलहे उसने अपने पास ही छिपाकर रख लिए। इसके बाद ये हथियार 10 से 15 हजार रुपये का मोटा कमीशन लेकर आगे से आगे ट्रांसफर होते चले गए।

70 हजार से ढाई लाख रुपये तक में बिकी एक-एक अवैध पिस्टल

पुलिसिया जांच और रिमांड के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि मालखाने से चुराए गए इन हथियारों को बाजार में 70 हजार रुपये से लेकर ढाई लाख रुपये तक की मोटी कीमत पर बेचा गया था। अपराधियों ने मोटी कमाई के चक्कर में एक-एक पिस्टल को दो से तीन बार अलग-अलग खरीदारों को आगे बेचा।

हथियार खरीदने और बेचने वाला हर बिचौलिया बीच में अपना 10 से 15 हजार रुपये का कमीशन काट लेता था। अदालत ने पुलिस की दलीलें सुनने के बाद सख्त टिप्पणी की कि पुलिस थाने के भीतर से हथियार चोरी होना और उनका अपराधियों के हाथों में पहुंचना समाज की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है, इसलिए अन्य आरोपियों को जेल में ही रहना होगा।

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