Jharkhand News: धनबाद जिले के बलियापुर प्रखंड में जमीन के नीचे से मीठा पानी नहीं बल्कि धीमा जहर निकल रहा है। घड़बड़ ग्राम पंचायत और आसपास के इलाकों में भूजल में फ्लोराइड की मात्रा खतरे के निशान को पार कर चुकी है। यह जहरीला पानी मासूम बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से लगातार बीमार कर रहा है।
हाल ही में अमेरिकन केमिकल सोसाइटी के प्रतिष्ठित जर्नल में एक नई रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। ईएस एंड टी वाटर 2026 की इस विस्तृत रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले वैज्ञानिक तथ्य सामने आए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार पानी में फ्लोराइड की मात्रा तय मानकों से कई गुना ज्यादा है। इससे बच्चों का नर्वस सिस्टम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
दिमागी विकास पर पड़ रहा सीधा असर
जादवपुर विश्वविद्यालय और मेघ पाईन अभियान ने मिलकर इस क्षेत्र में विस्तृत शोध कार्य किया है। इस शोध से स्पष्ट पता चला है कि फ्लोराइड के कारण बच्चों के मानसिक विकास में भारी गिरावट आई है। परीक्षण में शामिल 67 प्रतिशत बच्चों का आईक्यू स्तर केवल औसत दर्जे तक ही सिमट कर रह गया है।
यह प्रदूषित पानी केवल दिमाग ही नहीं बल्कि मासूमों के शरीर को भी खोखला कर रहा है। स्वास्थ्य जांच में चार से 12 साल के 50 फीसदी स्कूली बच्चे फ्लोरोसिस बीमारी के गंभीर शिकार मिले हैं। इन बच्चों में दांतों का पीलापन, सड़न और हड्डियों व जोड़ों के मुड़ने जैसी दर्दनाक शारीरिक समस्याएं साफ तौर पर देखी जा रही हैं।
इन गांवों में स्थिति सबसे ज्यादा खराब
विशेषज्ञों की एक टीम ने बलियापुर पंचायत के छह अलग-अलग गांवों से पानी के 315 नमूने लिए थे। इनमें से करीब 36 प्रतिशत नमूनों में फ्लोराइड विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से बहुत अधिक मिला है। सबसे बुरी स्थिति घड़बड़ गांव की है, जहां 67 प्रतिशत जलस्रोत पूरी तरह से जहरीले और खतरनाक हो चुके हैं।
कालीपुर और शिवपुर जैसे गांवों का पीने का पानी भी अब इंसानों के लायक नहीं बचा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस पूरे इलाके की चट्टानों में फ्लोराइट खनिज भारी मात्रा में मौजूद है। पानी में क्षारीय गुण और सोडियम की अधिकता के कारण यह फ्लोराइड तेजी से घुलकर सीधे भूजल में मिल रहा है।
आने वाली पीढ़ी को बचाना है जरूरी
शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि अगर जल्दी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियां हमेशा के लिए अपंगता की शिकार हो जाएंगी। बच्चों के यूरिन सैंपल में भारी मात्रा में फ्लोराइड मिला है। प्रभावित गांवों में तुरंत फ्लोराइड रिमूवल प्लांट लगाने और बच्चों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की सख्त जरूरत है।
Author: Rohit Mahato

