Patna News: बिहार के स्नातक (ग्रेजुएशन) छात्रों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार और राजभवन ने चार वर्षीय स्नातक डिग्री कोर्स के चौथे वर्ष में प्रमोशन के लिए तय की गई 7.5 सीजीपीए (CGPA) की अनिवार्य बाध्यता को अब पूरी तरह से खत्म कर दिया है।
इस ऐतिहासिक फैसले के बाद सूबे के सभी विश्वविद्यालयों में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के चौथे वर्ष में प्रवेश को लेकर चल रही असमंजस की स्थिति पूरी तरह समाप्त हो गई है। राजभवन ने संबंधित अध्यादेश में महत्वपूर्ण संशोधन करके यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि छह सेमेस्टर पूरा करने वाले सभी विद्यार्थियों को 7वें सेमेस्टर में आसानी से प्रवेश मिलेगा।
राज्यपाल ने संशोधित अध्यादेश को दी अपनी आधिकारिक मंजूरी
अब बिहार के किसी भी कॉलेज में किसी भी विद्यार्थी को केवल कम सीजीपीए होने के आधार पर चौथे वर्ष यानी सातवें सेमेस्टर में जाने से बिल्कुल नहीं रोका जाएगा। राज्यपाल के प्रधान सचिव दीपक कुमार सिंह ने बताया कि इस संशोधित कूटनीतिक अध्यादेश को माननीय राज्यपाल की अंतिम स्वीकृति मिल चुकी है।
शासन स्तर पर आधिकारिक अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है। बहुत जल्द ही राज्य के सभी विश्वविद्यालयों को इस नए नियम के अनुरूप त्वरित कार्रवाई करने का कड़ा निर्देश जारी कर दिया जाएगा। पिछले दिनों छात्रों के बीच इस नियम को लेकर एक बड़ा भ्रम फैला हुआ था।
7.5 से कम सीजीपीए वाले छात्रों को मिलेगी सामान्य ऑनर्स डिग्री
छात्रों को डर था कि जिनका छह सेमेस्टर के बाद 7.5 से कम सीजीपीए होगा, उन्हें केवल तीन वर्षीय स्नातक डिग्री देकर पढ़ाई समाप्त करनी होगी। इस पर कई छात्र संगठनों ने भारी विरोध प्रदर्शन भी किया था। अब नई व्यवस्था के तहत छठे सेमेस्टर में 7.5 या उससे अधिक सीजीपीए वाले छात्र आठवें सेमेस्टर में ‘रिसर्च’ का बेहतरीन विकल्प चुन सकेंगे।
ऐसे योग्य छात्रों को ‘ऑनर्स विथ रिसर्च’ की विशेष उपाधि प्रदान की जाएगी। दूसरी तरफ, जिन छात्रों का सीजीपीए 7.5 से कम होगा, वे भी चौथे वर्ष की पूरी पढ़ाई करेंगे। लेकिन वे आठवें सेमेस्टर में तय तीन विशेष पाठ्यक्रम अर्थात चार क्रेडिट का अध्ययन करेंगे। इन्हें अंत में सामान्य ऑनर्स डिग्री प्रदान की जाएगी।
तीन वर्ष में पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों के लिए भी विकल्प मौजूद
राजभवन द्वारा जारी नई कूटनीतिक व्यवस्था के तहत जो छात्र तीन वर्ष के बाद ही अपने स्नातक पाठ्यक्रम को समाप्त करना चाहते हैं, वे भी स्वतंत्र हैं। वे सातवें सेमेस्टर में नामांकन नहीं लेकर अपने कॉलेज या विश्वविद्यालय में एक साधारण आवेदन दे सकते हैं। वे निर्धारित सरकारी शुल्क जमा करके अपनी तीन साल की डिग्री प्राप्त कर सकते हैं।
इसके साथ ही नए नियमों के तहत अब ऑनर्स डिग्री के लिए पांचवें सेमेस्टर में व्यावहारिक इंटर्नशिप करना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। बिहार के सभी संबद्ध कॉलेजों में छठे सेमेस्टर का अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद ही सातवें सेमेस्टर में नामांकन की मुख्य प्रक्रिया को आधिकारिक तौर पर शुरू किया जाएगा।

