सिर्फ बैड कोलेस्ट्रॉल नॉर्मल होना नहीं है दिल की सलामती की गारंटी: हार्ट अटैक से बचना है तो कराएं ये 5 जरूरी टेस्ट

Health News: जब भी दिल की सेहत यानी हार्ट हेल्थ की बात होती है, तो ज्यादातर लोग केवल एलडीएल (LDL) यानी बैड कोलेस्ट्रॉल पर ही ध्यान देते हैं। वास्तव में एलडीएल का बढ़ा हुआ स्तर धमनियों में प्लाक जमा होने और हार्ट अटैक के खतरे को काफी हद तक बढ़ा देता है।

लेकिन केवल एलडीएल कोलेस्ट्रॉल देखकर किसी भी व्यक्ति में हार्ट अटैक या अन्य हृदय रोगों के खतरे को पूरी तरह से पहचाना नहीं जा सकता है। कई ऐसे लोग होते हैं जिनका एलडीएल लेवल बिल्कुल नॉर्मल होता है, लेकिन फिर भी उन्हें अचानक हार्ट अटैक या अन्य गंभीर हृदय समस्याएं हो जाती हैं।

यही वजह है कि आजकल के हृदय रोग विशेषज्ञ केवल कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट पर निर्भर नहीं रहते हैं। वे मरीजों को कई अन्य महत्वपूर्ण मेडिकल मार्कर्स की भी जांच करने की सलाह देते हैं। आइए जानते हैं शरीर के उन पांच बड़े मार्कर्स के बारे में जो आपके दिल की सही स्थिति बताते हैं।

1. हाई ट्राइग्लिसराइड्स (Triglycerides)

ट्राइग्लिसराइड्स असल में हमारे ब्लड में मौजूद एक विशेष प्रकार का फैट (वसा) है, जो शरीर को ऊर्जा देने का काम करता है। लेकिन धमनियों में इस फैट का अत्यधिक जमा होना दिल के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है और ब्लॉकलेज का खतरा बढ़ा देता है।

मेडिकल गाइडलाइंस के मुताबिक, शरीर में ट्राइग्लिसराइड्स का नॉर्मल लेवल 150 mg/dL से कम होना चाहिए। यदि आपके रक्त में ट्राइग्लिसराइड्स की मात्रा इससे ज्यादा पाई जाती है, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें, क्योंकि यह दिल की बीमारियों के खतरे को काफी बढ़ा देता है।

2. हाई एपोलिपोप्रोटीन बी (Apolipoprotein B)

एपोलिपोप्रोटीन बी (ApoB) एक बेहद महत्वपूर्ण प्रोटीन है, जो एलडीएल और शरीर के अन्य हानिकारक वसा कणों में मुख्य रूप से पाया जाता है। यह टेस्ट सटीक रूप से बताता है कि आपके ब्लड में धमनियों को नुकसान पहुंचाने वाले कुल कितने कण मौजूद हैं।

अगर आपकी मेडिकल रिपोर्ट में ApoB का लेवल सामान्य से ज्यादा आता है, तो यह धमनियों में प्लाक यानी ब्लॉकेज बनने की प्रक्रिया को तेज कर देता है। इसके कारण व्यक्ति को अचानक कार्डियक अरेस्ट या गंभीर हार्ट अटैक आने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

3. इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin Resistance)

इंसुलिन रेजिस्टेंस शरीर की वह स्थिति है जिसमें हमारे शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन हार्मोन के प्रति कम सेंसिटिव यानी संवेदनशील हो जाती हैं। यह स्थिति केवल डायबिटीज ही नहीं बढ़ाती, बल्कि धमनियों में खतरनाक सूजन और फैट जमा होने की प्रक्रिया को भी बहुत तेज कर देती है।

4. एब्डॉमिनल ओबेसिटी (Abdominal Obesity)

दिल की बीमारियों के मामले में सिर्फ आपका कुल वजन ही मायने नहीं रखता, बल्कि शरीर में फैट कहां जमा हो रहा है, यह देखना भी बेहद जरूरी है। पेट और कमर के आसपास जमा होने वाली अतिरिक्त चर्बी को सबसे ज्यादा नुकसानदेह माना जाता है।

पेट के आसपास की यह चर्बी हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को सीधे तौर पर ट्रिगर करती है। इसलिए अगर आपका वजन सामान्य है लेकिन कमर का घेरा लगातार बढ़ रहा है, तो इसे दिल की बीमारी का एक बड़ा चेतावनी संकेत समझें।

5. हाई सेंसिटिविटी सी रिएक्टिव प्रोटीन (hs-CRP)

हाई सेंसिटिविटी सी रिएक्टिव प्रोटीन (hs-CRP) हमारे शरीर के भीतर छिपी हुई सूजन (Inflammation) को मापने का एक बेहद खास और सटीक मार्कर है। लंबे समय तक शरीर और नसों में बनी रहने वाली यह सूजन धमनियों की दीवारों को अंदर से गंभीर नुकसान पहुंचाती है।

अगर किसी व्यक्ति की ब्लड रिपोर्ट में hs-CRP का लेवल बढ़ा हुआ आता है, तो यह साफ संकेत है कि शरीर के अंदरूनी हिस्सों में मौजूद सूजन भविष्य में हार्ट अटैक या स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा सकती है। इसलिए एलडीएल के साथ इन पांचों मार्कर्स की नियमित जांच जरूर कराएं।

Author: Asha Thakur

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