क्या आपका पार्टनर भी करने लगा है हद से ज्यादा कंट्रोल? जान लीजिए प्यार और सनक के बीच का बारीक अंतर!

Delhi News: प्यार का एहसास दुनिया में सबसे खूबसूरत माना जाता है, जिसमें इंसान हर वक्त अपने पार्टनर की खुशियों के बारे में सोचता है। लेकिन मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक, जब प्यार की ये सीमाएं टूटने लगती हैं, तो यही खूबसूरत रिश्ता एक बेहद खतरनाक और मानसिक बीमारी का रूप ले लेता है।

शुरुआती दौर में सच्चा प्यार और मानसिक दीवानगी बिल्कुल एक जैसे ही नजर आते हैं क्योंकि दोनों में ही पार्टनर को पाने की तीव्र इच्छा होती है। लेकिन असल में सच्चा प्यार हमेशा आपसी आजादी, अटूट भरोसे और सम्मान की मजबूत बुनियाद पर टिका होता है, जो आपको बेहतर इंसान बनाता है।

इसके विपरीत, जब यह भावना सनक या ऑब्सेशन में बदलने लगती है, तो इंसान अपने पार्टनर को सिर्फ एक वस्तु समझने लगता है। मानसिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्थिति में व्यक्ति सामने वाले पर अपना पूरा हक जमाने की कोशिश करता है, जिससे रिश्ते में शक और असुरक्षा की भावना पैदा होती है।

क्या है ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर और इसके घातक परिणाम

मनोविज्ञान की भाषा में इस गंभीर मानसिक स्थिति को ‘ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर’ कहा जाता है, जो एक खामोश बीमारी की तरह पनपता है। इसमें पीड़ित व्यक्ति अपने पार्टनर को लेकर इस कदर असुरक्षित हो जाता है कि वह उसकी हर एक छोटी-बड़ी गतिविधि को पूरी तरह नियंत्रित करना चाहता है।

ऐसा सनकी पार्टनर चौबीसों घंटे इस बात पर नजर रखता है कि उसका साथी किससे बात कर रहा है और कहां जा रहा है। वह पार्टनर के सोशल मीडिया अकाउंट्स और फोन कॉल्स की जासूसी करने लगता है, जो सीधे तौर पर एक गंभीर मानसिक बीमारी का सबसे बड़ा और शुरुआती लक्षण माना जाता है।

चिकित्सकों के मुताबिक, जब कोई इंसान अपनी नौकरी, परिवार, दोस्तों और खुद की परवाह छोड़कर केवल पार्टनर के बारे में सोचने लगे, तो स्थिति बिगड़ जाती है। साथी से थोड़ी देर भी दूर होने के विचार मात्र से पैनिक अटैक आना इस बीमारी की गंभीर अवस्था को दर्शाता है।

बचपन का अकेलापन और अटैचमेंट इश्यूज हैं मुख्य वजह

लगातार फोन या मैसेज करना और पार्टनर की पूरी जिंदगी को अपने हिसाब से चलाने की जिद करना ही असली दीवानगी का संकेत है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या अक्सर उन लोगों में ज्यादा देखी जाती है, जो बचपन में गंभीर अकेलेपन या अटैचमेंट इश्यूज से गुजरे होते हैं।

ऐसे लोग भविष्य में अपने लाइफ पार्टनर को खोने के डर से हर वक्त बुरी तरह घबराए रहते हैं। इसी अत्यधिक डर के कारण उनका प्यार एक मानसिक बीमारी का रूप ले लेता है, जहां वे यह पूरी तरह भूल जाते हैं कि किसी भी मजबूत रिश्ते में पर्सनल स्पेस देना कितना जरूरी है।

यदि समय रहते इन लक्षणों को पहचानकर किसी अच्छे थेरेपिस्ट या काउंसलर की मदद न ली जाए, तो यह रिश्ता दोनों ही पार्टनर्स के लिए बेहद प्रताड़ित करने वाला बन जाता है। एक स्वस्थ रिश्ते के लिए हमेशा प्यार और सनक के बीच की इस बारीक लक्ष्मण रेखा को समझना बेहद जरूरी है।

Author: Karuna Sen

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