जिम जाने के शौकीन दिल के मरीज सावधान! गलत एक्सरसाइज बढ़ा सकती है हार्ट अटैक का खतरा, तुरंत सुधारें ये 4 आदतें

Delhi News: आजकल फिट रहने के लिए जिम जाना और हैवी वर्कआउट करना एक बड़ा ट्रेंड बन चुका है। लेकिन गलत तरीके से या बिना सोचे-समझे की गई एक्सरसाइज से दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर बहुत तेजी से बढ़ सकता है, जिससे सीधे दिल पर जानलेवा दबाव पड़ता है।

यही मुख्य वजह है कि दिल की बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए यह बारीकी से समझना बेहद जरूरी हो जाता है कि कौन सी एक्सरसाइज उनके कमजोर दिल के लिए फायदेमंद हैं और किन खतरनाक गतिविधियों से उन्हें जिंदगी भर पूरी तरह दूरी बनाकर रखनी चाहिए।

सही जानकारी और जरूरी सावधानियों के साथ किया गया हल्का एक्सरसाइज रूटीन आपके दिल की सेहत को काफी ज्यादा बेहतर और मजबूत बना सकता है। इसके बिल्कुल उलट, अपनी क्षमता से बाहर जाकर गलत तरह की एक्सरसाइज करने से शरीर को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

क्षमता के अनुसार ही करें शारीरिक एक्टिविटी

स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस बात पर विशेष रूप से जोर देते हैं कि दिल की पुरानी बीमारी से पीड़ित लोगों को शारीरिक एक्सरसाइज जरूर करनी चाहिए। लेकिन उन्हें सिर्फ अपनी वास्तविक शारीरिक क्षमता की तय सीमा के भीतर और अपने डॉक्टर की उचित सलाह के अनुसार ही आगे बढ़ना चाहिए।

ज्यादा जोर वाली एक्सरसाइज, बहुत भारी वजन उठाना या अचानक से बहुत ज्यादा शारीरिक मेहनत करना कुछ दिल के गंभीर मरीजों के लिए बेहद खतरनाक और जानलेवा साबित हो सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि दिल के मरीजों को किन वर्कआउट से बचना चाहिए।

भूलकर भी न उठाएं बहुत ज्यादा भारी वजन

एक प्रसिद्ध हेल्थ वेबसाइट के अनुसार, दिल के मरीजों को बहुत ज्यादा भारी वजन उठाने (हैवी वेट लिफ्टिंग) जैसी एक्सरसाइज से पूरी तरह बचना चाहिए। जिम में जाकर बहुत भारी डम्बल उठाना, डेडलिफ्ट करना, भारी स्क्वैट्स और बेंच प्रेस लगाने जैसी गलतियों से सीधे परहेज करें।

इस तरह की अत्यधिक वजन उठाने वाली गतिविधियों से शरीर के ब्लड प्रेशर में अचानक बहुत तीव्र तेजी आ सकती है। ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ने से दिल की धमनियों पर बहुत ज्यादा जोर पड़ता है, जो हार्ट फेलियर या अचानक कार्डियक अरेस्ट का बड़ा कारण बन सकता है।

हाई-इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग (HIIT) से बनाएं दूरी

हाई-इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग यानी एचआईआईटी (HIIT) में बेहद कम समय के भीतर बहुत तेज रफ्तार और आक्रामक तरीके से एक्सरसाइज करना शामिल होता है। जहां यह वर्कआउट पूरी तरह स्वस्थ लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है, वहीं दिल के मरीजों के लिए इसे सुरक्षित नहीं माना जाता।

यह एडवांस वर्कआउट सीधे दिल की कार्यप्रणाली पर बहुत गहरा और अचानक दबाव डालता है। इसलिए, अगर आप दिल के मरीज हैं, तो इस तरह की किसी भी हाई-इंटेंसिटी ट्रेनिंग को शुरू करने से पहले अपने कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर से व्यक्तिगत सलाह लेना बेहद जरूरी है।

अचानक और जोरदार वर्कआउट करने से बचें

दिल के मरीजों को बहुत ज्यादा जोरदार एक्सरसाइज जैसे तेज दौड़ना, बार-बार ऊंची छलांग लगाना, या कोई भी ऐसी थका देने वाली शारीरिक गतिविधि जिसमें अचानक तेज हलचल की जरूरत हो, उससे दूरी बनानी चाहिए। ऐसी एक्सरसाइज से शरीर के नाजुक जोड़ों पर काफी जोर पड़ता है।

यह जोरदार हरकतें दिल को सामान्य क्षमता से कई गुना ज्यादा तेजी से मेहनत करने पर पूरी तरह मजबूर कर देती हैं। इसके अलावा, यह अचानक होने वाली तेज हलचलें दिल और खून की नसों (ब्लड वेसल्स) दोनों पर एक साथ बहुत ज्यादा दबाव डाल सकती हैं।

वार्म-अप और कूल-डाउन को न करें नजरअंदाज

दिल की बीमारी वाले लोगों के लिए, वर्कआउट से पहले वार्म-अप और बाद में कूल-डाउन किए बिना सीधे मुख्य एक्सरसाइज रूटीन शुरू कर देना बहुत नुकसानदायक हो सकता है। सही तरीके से किया गया वार्म-अप शरीर और दिल को धीरे-धीरे शारीरिक मेहनत के लिए तैयार करता है।

इससे यह पूरी तरह पक्का हो जाता है कि आपके दिल की धड़कन अचानक से अनियंत्रित होकर न बढ़े। दूसरी ओर, एक्सरसाइज खत्म करने के बाद कूल-डाउन करने से दिल की बढ़ी हुई धड़कन और शरीर के तापमान को वापस सामान्य और सुरक्षित स्थिति में लाने में मदद मिलती है।

Author: Asha Thakur

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