Health News: पिछले कुछ वर्षों में कैंसर के इलाज की तकनीक में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं। इस जानलेवा बीमारी से लड़ने के लिए मुख्य रूप से कीमोथेरेपी और इम्यूनोथेरेपी का उपयोग किया जाता है। दोनों ही पद्धतियां शरीर में कैंसर सेल्स को खत्म करने का बेहतरीन काम करती हैं।
हालांकि, कार्यप्रणाली के मामले में कीमोथेरेपी और इम्यूनोथेरेपी एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हैं। आमतौर पर लोग केवल कीमोथेरेपी के बारे में ही जानते हैं। लेकिन डॉक्टर मरीज की वर्तमान स्थिति, कैंसर के प्रकार और उसके स्टेज के आधार पर ही सही थेरेपी का चुनाव करते हैं।
फरीदाबाद के सर्वोदय हॉस्पिटल (सेक्टर-8) में मेडिकल ऑन्कोलॉजी, हेमेटोलॉजी और बीएमटी विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर व हेड ने इस विषय पर विशेष जानकारी साझा की है। उन्होंने दोनों थेरेपी के बीच के अंतर को बहुत ही सरल शब्दों में विस्तार से समझाया है।
तेजी से बढ़ने वाली कोशिकाओं पर कीमो का हमला
कैंसर के इलाज में कीमोथेरेपी सबसे पुरानी और भरोसेमंद चिकित्सा पद्धति मानी जाती है। इसके तहत शक्तिशाली दवाओं का उपयोग किया जाता है। ये दवाएं शरीर में बहुत तेजी से विभाजित होने वाली और बढ़ने वाली कैंसर कोशिकाओं को सीधे निशाना बनाकर नष्ट करने का काम करती हैं।
इस थेरेपी का एक बड़ा नुकसान यह है कि दवाएं कैंसर सेल्स के साथ-साथ शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को भी नष्ट करने लगती हैं। यही वजह है कि कीमोथेरेपी के दौरान मरीजों के बाल झड़ने लगते हैं, मुंह में छाले पड़ते हैं और बोन मैरो पर भी इसका असर दिखता है।
इम्यूनिटी को हथियार बनाती है इम्यूनोथेरेपी
इम्यूनोथेरेपी चिकित्सा जगत की एक बेहद आधुनिक और उन्नत तकनीक है। यह सीधे कैंसर कोशिकाओं पर हमला नहीं करती। इसके बजाय, यह मरीज के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को इतना मजबूत और सक्रिय बना देती है कि शरीर खुद कैंसर सेल्स को पहचानकर उनसे लड़ने लगता है।
विशेषज्ञ डॉक्टर विष्णु हरि के अनुसार, दोनों थेरेपी के साइड इफेक्ट्स भी काफी अलग होते हैं। कीमोथेरेपी में मरीज को अक्सर उल्टी, मतली, अत्यधिक थकान, कमजोरी और संक्रमण का खतरा रहता है। वहीं, इम्यूनोथेरेपी में त्वचा पर चकत्ते, दस्त या शरीर के आंतरिक अंगों में सूजन आ सकती है।
क्या हर मरीज को दी जा सकती है इम्यूनोथेरेपी?
डॉक्टर विष्णु हरि ने स्पष्ट किया कि हर प्रकार के कैंसर में इम्यूनोथेरेपी प्रभावी नहीं होती है। इलाज का तरीका तय करने से पहले कैंसर का प्रकार, उसकी स्टेज और मरीज की शारीरिक क्षमता की गहन जांच की जाती है। इसके बाद ही सही निर्णय लिया जाता है।
अनेक मामलों में डॉक्टरों को केवल कीमोथेरेपी से ही बेहतरीन परिणाम मिल जाते हैं। वहीं, कुछ जटिल मामलों में मरीज को कीमोथेरेपी और इम्यूनोथेरेपी दोनों का कंबाइंड डोज दिया जाता है। सही समय पर सही थेरेपी का चुनाव ही कैंसर से रिकवरी की संभावना को कई गुना बढ़ा देता है।
Author: Asha Thakur

