सादगी के सम्राट गीतकार योगेश: जब 16 साल का लड़का लखनऊ से निकला और बदल दिया हिंदी सिनेमा का इतिहास!

Entertainment News: हिंदी सिनेमा के इतिहास में अपनी सादगी और गहरे अर्थों वाले गीतों से पहचान बनाने वाले दिग्गज गीतकार योगेश गौड़ का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। साल 1943 में महज 16 साल की उम्र में लखनऊ का यह लड़का जब सपनों की नगरी मुंबई पहुंचा, तो किसी ने नहीं सोचा था कि वह भारतीय संगीत की परिभाषा बदल देगा।

मुंबई आने के बाद योगेश जी ने अपनी कलम से ऐसा जादू बिखेरा कि लोग आज भी उनके लिखे नगमों में सुकून तलाशते हैं। 60 और 70 के दशक में जहां भारी-भरकम शब्दों का चलन था, वहीं उन्होंने आम आदमी के जज्बातों को बेहद सरल और मर्मस्पर्शी जुबान में पिरोने का काम किया।

फिल्म ‘आनंद’ के अमर गीत ‘कहीं दूर जब दिन ढल जाए’ और ‘जिंदगी कैसी है पहेली’ आज भी उतने ही प्रासंगिक और ताजा लगते हैं, जितने दशक पहले थे। उनकी सबसे बड़ी खूबी यही थी कि उनके लिखे शब्द सीधे सुनने वाले के दिल पर गहराई से दस्तक देते थे।

दिग्गज निर्देशकों के साथ यादगार जुगलबंदी

गीतकार योगेश ने ऋषिकेश मुखर्जी और बासु चटर्जी जैसे महान निर्देशकों के साथ मिलकर भारतीय सिनेमा को कई कालजयी गाने दिए। इनमें ‘रजनीगंधा फूल तुम्हारे’, ‘रिमझिम गिरे सावन’ और ‘बड़ी सूनी सूनी है’ जैसे बेहतरीन नगमे शामिल हैं, जो आज भी संगीत प्रेमियों की जुबान पर रहते हैं।

उनकी रचनाओं में जीवन के उतार-चढ़ाव, उदासी, प्रेम और दर्शन का एक ऐसा अनूठा संगम मिलता था जो श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता था। फिल्मों के अलावा उन्होंने टीवी धारावाहिकों और बाद के दौर में ‘बेवफा सनम’ जैसी सुपरहिट एल्बम्स के लिए भी शानदार और यादगार गीत लिखे।

एल्बम गानों में संगीतकार निखिल-विनय की जोड़ी के साथ उनके तालमेल को दर्शकों ने काफी पसंद किया था। एक समय ऐसा भी था जब उनकी जादुई लेखनी के बिना कोई भी बड़ी फिल्म अधूरी मानी जाती थी। उन्होंने दिखाया कि भावनाओं को व्यक्त करने के लिए क्लिष्ट शब्दों की जरूरत नहीं होती।

अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजे गए

भारतीय गीतकारी और सिनेमा में उनके इस अभूतपूर्व योगदान के लिए उन्हें ‘दादासाहब फाल्के’ और ‘यश भारती’ जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। भले ही 29 मई 2020 को बीमारी की वजह से वह इस दुनिया को अलविदा कह गए, लेकिन उनकी अनमोल विरासत हमेशा जिंदा रहेगी।

‘आए तुम याद मुझे’ जैसे गीतों को सुनते हुए आज भी ऐसा महसूस होता है मानो योगेश जी अपनी रचनाओं के जरिए हमसे सीधे संवाद कर रहे हों। हिंदी सिनेमा का वह सुरीला युग भले ही उनके साथ समाप्त हो गया, लेकिन उनके सदाबहार गीत सदियों तक लोगों को प्रेरित करते रहेंगे।

Author: Manisha Thakur

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