फांसी के फंदे पर झूली आबरू! कोर्ट ने सुनाई 20 साल की कठोर सजा, मैथिलीशरण गुप्त की कविता पढ़ रो पड़े जज

Banda News: सामूहिक दुष्कर्म से आहत होकर एक नाबालिग किशोरी के फंदा लगाकर आत्महत्या करने के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट अनिल कुमार खरवार की अदालत ने शनिवार को मुख्य दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही दोषी पर 19 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।

इस बेहद संवेदनशील मामले का फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश काफी भावुक हो गए। उन्होंने अपने निर्णय में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की प्रसिद्ध पंक्तियां भी लिखीं। जज ने लिखा, ‘अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी, आंचल में है दूध और आंखों में पानी।’ उन्होंने कहा कि जिन दर्दनाक परिस्थितियों में पीड़ित बेटी की मौत हुई, उसमें यह पंक्तियां बिल्कुल सटीक बैठती हैं।

अदालत ने मामले के दूसरे आरोपी बाल अपचारी की फाइल को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए किशोर न्याय बोर्ड भेज दिया है। विशेष लोक अभियोजक पाक्सो एक्ट रुद्रप्रताप सिंह ने बताया कि पीड़िता के पिता ने तहरीर देकर शिकायत दर्ज कराई थी। पड़ोसी सद्दीक ने उनकी 17 वर्षीय बेटी से छेड़छाड़ कर धमकी दी थी।

घर में घुसकर किया सामूहिक दुष्कर्म

बेटी के आपबीती बताने पर पिता ने आरोपी के घर जाकर शिकायत की थी। इसके बाद 22 मई 2017 को माता-पिता एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए बांदा चले गए। घर में उनकी तीन बेटियां अकेली थीं। रात करीब 11:30 बजे आरोपी सद्दीक अपने एक नाबालिग साथी के साथ दीवार फांदकर घर के अंदर घुस गया।

दोनों आरोपियों ने आंगन में सो रही बड़ी बेटी के साथ जबरन सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। पीड़िता के चीखने-चिल्लाने की आवाज सुनकर कमरे में सो रही उसकी दोनों छोटी बहनें भी तुरंत जाग गईं। उन्होंने शोर मचाने की कोशिश की, तो आरोपियों ने उनके साथ भी मारपीट और हाथापाई शुरू कर दी।

इस भयानक सामूहिक दुष्कर्म की घटना से बेहद आहत होकर पीड़िता ने कमरे के अंदर दुपट्टे से फंदा लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। उसे मृत देखकर आरोपी दोनों छोटी बहनों को जान से मारने की धमकी देते हुए मौके से फरार हो गए। हालांकि, भागते समय आरोपियों का मोबाइल फोन शव के पास ही गिर गया था।

शव के पास मिले मोबाइल से खुला राज

घटनास्थल पर गिरे उसी मोबाइल फोन की मदद से पुलिस ने आरोपियों की पहचान की थी। पिता की तहरीर के आधार पर पुलिस ने सामूहिक दुष्कर्म, आत्महत्या के लिए उकसाने, जान से मारने की धमकी और पाक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने पूरी तत्परता से जांच कर आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया था।

अदालत ने सभी गवाहों के बयान और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर सद्दीक को दोषी पाया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाना समाज की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। इस कड़े फैसले के बाद पीड़िता के परिवार को उम्मीद के मुताबिक न्याय मिल सका है।

Author: Ajay Mishra

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