Kanpur News: उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर से साइबर अपराध को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक शहर में ऑनलाइन ठगी करने वाले अपराधियों में 57 प्रतिशत केवल नाबालिग बच्चे हैं। यह नया ट्रेंड सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है।
कानपुर में हर दिन साइबर अपराध के औसतन छह मामले दर्ज किए जा रहे हैं। इसका मतलब है कि हर महीने 180 और साल भर में 2160 मामले सामने आते हैं। पुलिस इनमें से महज 30 से 40 प्रतिशत मामलों का ही निस्तारण कर पाती है। इसी बीच सरकारी आंकड़ों में 127 नाबालिगों के शातिर ठग बनने की बात सामने आई है।
पिता के बैंक खाते से उड़ाए दो लाख रुपये
सरकारी काउंसलर विजय कटियार ने अपनी ताजा रिपोर्ट में बेहद दिलचस्प कहानियां साझा की हैं। उन्होंने बताया कि रेलवे के एक बड़े अधिकारी के 11वीं क्लास में पढ़ने वाले बेटे ने सबसे पहली साइबर ठगी अपने ही पिता के साथ की। उसने पिता के बैंक खाते से दो लाख रुपये गायब कर दिए।
इस छात्र ने नौवीं क्लास में ही इंटरनेट के जरिए फिशिंग और हैकिंग सीख ली थी। उसने अपनी क्लास टीचर का मोबाइल फोन भी हैक कर लिया था। इसके बाद स्कूल प्रशासन ने उसे बाहर निकाल दिया। फिलहाल पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर इटावा के बाल सुधार गृह भेज दिया है।
जीजा का फोन रिमोट पर लेकर साफ किया अकाउंट
इसी तरह एक अन्य मामले में एक छात्र ने अपनी बहन की शादी के बाद मायके आए जीजा का मोबाइल फोन देखने के बहाने लिया। उसने चालाकी से उस फोन को रिमोट एक्सेस पर ले लिया। जीजा के घर पहुंचने से पहले ही उसने खाते से तीन लाख रुपये ट्रांसफर कर लिए।
काउंसलिंग रिपोर्ट के अनुसार पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज इन 127 नाबालिगों में से कोई भी मजबूरी के कारण अपराधी नहीं बना। अधिकांश बच्चों को महंगे शौक पूरे करने, अय्याशी करने या नशे की लत को शांत करने के लिए यह सबसे आसान और सुरक्षित रास्ता लगा। कुछ बच्चे ऑनलाइन गेमिंग के जाल में फंसकर अपराधी बन गए।
यूट्यूब और गूगल बाबा से मिला ठगी का ज्ञान
काउंसलर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इन बच्चों ने ठगी से जुड़ी खबरें पढ़ने के बाद सबसे पहले सर्च इंजन गूगल का सहारा लिया। उन्होंने वीडियो प्लेटफॉर्म यूट्यूब पर घंटों ऑनलाइन वीडियो देखे। वहां से मिले ज्ञान और साइबर क्राइम की डिजिटल बुक्स पढ़कर उन्होंने वारदात करने का तरीका सीखा।
इन बच्चों ने सबसे पहला शिकार अपने परिवार और रिश्तेदारों को बनाया ताकि पकड़े जाने का खतरा कम रहे। इसके बाद उन्होंने समाज के अन्य लोगों को निशाना बनाना शुरू किया। पहली बार में सफलता मिलने के बाद इन बच्चों के मन से कानून और पुलिस का डर पूरी तरह खत्म हो गया।
अभिभावकों के लिए बेहद जरूरी गाइडलाइंस
- बच्चों को स्मार्टफोन के साथ लंबे समय के लिए अकेला बिल्कुल न छोड़ें।
- इंटरनेट और सोशल मीडिया पर उनकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखें।
- जिस मोबाइल में आपका बैंक अकाउंट लिंक हो, वह बच्चों को न दें।
- बच्चों के दोस्तों और उनके खर्चों पर हमेशा ध्यान रखें।
- अगर बच्चा नजरें चुराने लगे या अलग-थलग रहने लगे तो सतर्क हो जाएं।
Author: Ajay Mishra


