Canada News: कनाडा की पील रीजनल पुलिस ने जबरन वसूली और हिंसक अपराधों के आरोप में भारतीय मूल के 17 लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि आरोपी एक अंतरराष्ट्रीय एक्सटॉर्शन नेटवर्क चला रहे थे। यह गिरोह खासतौर पर पंजाबी डायस्पोरा और दक्षिण एशियाई कारोबारियों को निशाना बना रहा था।
पील रीजनल पुलिस की एक्सटॉर्शन टास्क फोर्स ने संयुक्त जांच के बाद इन गिरफ्तारियों की घोषणा की। जांच दिसंबर 2025 में शुरू हुई थी और अप्रैल 2026 में कई स्थानों पर छापेमारी के साथ आगे बढ़ी। अधिकारियों ने कुल 106 आपराधिक आरोप दर्ज किए हैं। पुलिस के मुताबिक आरोपी ‘फॉर ब्रदर्स’ नामक संगठित अपराध गिरोह से जुड़े हैं।
गोलीबारी और आगजनी से फैलाया जाता था डर
जांच एजेंसियों के अनुसार गिरोह ब्रैम्पटन, मिसिसॉगा, कैलेडन और ब्रिटिश कोलंबिया के कई हिस्सों में सक्रिय था। नेटवर्क के तार अमेरिका के कैलिफोर्निया तक जुड़े बताए गए हैं। पुलिस का कहना है कि रेस्टोरेंट मालिकों और ट्रकिंग कारोबारियों से बार-बार पैसों की मांग की जाती थी और मना करने पर हिंसक हमले किए जाते थे।
पुलिस ने बताया कि आरोपियों को 24 अलग-अलग घटनाओं से जोड़ा गया है। इनमें 16 गंभीर हिंसक अपराध शामिल हैं। जांचकर्ताओं के अनुसार कई मामलों में गोलीबारी और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। अधिकारियों ने दावा किया कि नेटवर्क से जुड़े मामलों में कम से कम 324 राउंड गोलियां चलाई गईं।
कई शहरों में चलाया गया संयुक्त अभियान
जांच के दौरान पुलिस ने छह हथियार, अवैध ड्रग्स, मोबाइल फोन, सिम कार्ड और कथित फर्जी पहचान दस्तावेज जब्त किए। गिरफ्तार आरोपियों में ब्रैम्पटन, सरे और नॉरवल के कई भारतीय मूल के युवक शामिल हैं। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया कि अदालत में अभी किसी भी आरोपी के खिलाफ आरोप साबित नहीं हुए हैं।
पील रीजनल पुलिस प्रमुख निशान दुरईप्पा ने कहा कि जबरन वसूली अब केवल स्थानीय अपराध नहीं रह गया है। इसके अंतरराष्ट्रीय संबंध सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे नेटवर्क को खत्म करने के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच मजबूत तालमेल और इंटेलिजेंस शेयरिंग बेहद जरूरी हो गई है।
डिपोर्टेशन का भी सामना कर सकते हैं आरोपी
कनाडाई अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार किए गए छह लोगों को इमिग्रेशन नियमों के तहत कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इसमें आपराधिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद देश से निकाला जाना भी शामिल है। कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी ने भी कुछ लोगों को हिरासत में लिया है और जांच जारी रखी है।
सीबीएसए प्रमुख एरिन ओ’गोरमैन ने कहा कि एजेंसी ने जबरन वसूली से जुड़े मामलों में इमिग्रेशन कानूनों को और सख्त किया है। अधिकारियों के मुताबिक 7 मई 2026 तक 446 इमिग्रेशन जांच शुरू की गईं। इसके अलावा 118 हटाने के आदेश जारी हुए और 55 लोगों को कनाडा से बाहर भेजा जा चुका है।
2023 से बढ़ीं थीं शिकायतें और धमकियां
पील पुलिस ने 2023 में दक्षिण एशियाई कारोबारियों से धमकी और वसूली की बढ़ती शिकायतों के बाद विशेष टास्क फोर्स बनाई थी। पुलिस का कहना है कि कई पीड़ित बदले की कार्रवाई के डर से शिकायत दर्ज नहीं कराते। सोशल मीडिया, नकली नंबर और ड्राइव-बाय शूटिंग जैसी धमकियों का इस्तेमाल लगातार बढ़ा है।
इस साल जनवरी में कनाडा की फेडरल सरकार ने जबरन वसूली के मामलों से निपटने के लिए पील पुलिस को एक मिलियन कनाडाई डॉलर तक की फंडिंग देने की घोषणा की थी। इस राशि का इस्तेमाल पीड़ित सहायता सेवाओं को मजबूत करने और एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने में किया जा रहा है।
Author: Pallavi Sharma

