बरसों का इंतजार खत्म! हिमाचल में हजारों कच्चे कर्मचारी हुए पक्के, सरकार ने जारी किए नए नियम

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के हजारों कच्चे कर्मचारियों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है। राज्य सरकार ने अनुबंध (कांट्रैक्ट), दिहाड़ीदारों और कंटीजैंट कर्मचारियों को पक्का करने का फैसला लिया है। कार्मिक विभाग ने बुधवार को इसके लिए विस्तृत आदेश जारी कर दिए हैं। यह फैसला आदेश जारी होने वाले दिन से ही लागू माना जाएगा। सरकार ने सभी विभागों और अधिकारियों को इन नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। बरसों से पक्के होने का इंतजार कर रहे कर्मचारियों के परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

अनुबंध कर्मचारियों के लिए क्या हैं नए नियम?

सरकार ने कांट्रैक्ट कर्मचारियों को पक्का करने के लिए कुछ शर्तें तय की हैं।

  • 2 साल की लगातार सेवा पूरी करना सबसे जरूरी है।
  • पक्का करने की यह प्रक्रिया साल में दो बार होगी।
  • यह काम हर साल मार्च और सितंबर के महीने में किया जाएगा।
  • 31 मार्च 2026 तक 2 साल पूरे करने वाले अब पक्के होंगे।
  • 30 सितंबर 2026 को 2 साल पूरे करने वालों को भी लाभ मिलेगा।

दिहाड़ीदारों को पक्का करने की अहम शर्तें

दिहाड़ीदारों और कंटीजैंट कर्मचारियों के लिए नियम थोड़े अलग बनाए गए हैं।

  • इन्हें पक्का होने के लिए 4 साल की निरंतर सेवा पूरी करनी होगी।
  • एक साल में कम से कम 240 दिन की ड्यूटी होनी चाहिए।
  • जनजातीय क्षेत्रों के कर्मचारियों के लिए इस नियम में विशेष छूट रहेगी।
  • 31 मार्च 2026 तक 4 साल पूरे करने वालों को पक्का किया जाएगा।
  • 30 सितंबर 2026 तक 4 साल पूरे करने वाले भी पक्के होने के हकदार होंगे।

पक्का होने के लिए इन नियमों का करना होगा पालन

सरकार ने नियमितीकरण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सख्त नियम लागू किए हैं। यह पूरी प्रक्रिया केवल वरिष्ठता के आधार पर ही होगी। अयोग्य कर्मचारियों को इस पक्की सूची से पूरी तरह बाहर रखा जाएगा।

  • कर्मचारी का मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट देना बेहद अनिवार्य है।
  • चरित्र सत्यापन हिमाचल प्रदेश के वित्तीय नियमों के अनुसार किया जाएगा।
  • हर सरकारी विभाग में एक विशेष स्क्रीनिंग कमेटी बनाई जाएगी।
  • दिहाड़ीदारों को केवल पहले से मौजूद खाली पदों पर ही पक्का किया जाएगा।
  • इस काम के लिए कोई भी नया पद सृजित नहीं किया जाएगा।
  • नियमित होने के बाद दैनिक वेतनभोगी का मूल पद स्वतः समाप्त हो जाएगा।

यह पूरी प्रक्रिया संबंधित विभाग के पास मौजूद बजट पर निर्भर करेगी। इसके लिए अतिरिक्त बजट की कोई मांग नहीं की जा सकेगी। आरक्षण रोस्टर का पूरी सख्ती से पालन किया जाएगा। पक्के होने वाले कर्मचारियों को सरकार राज्य में कहीं भी नियुक्त कर सकती है।

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