किताबें छोड़ होटल में काम करने पहुंचे स्कूली बच्चे, क्या हिमाचल के इस नए प्रयोग से बदल जाएगा भविष्य?

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में स्कूली शिक्षा को लेकर एक अनूठी पहल देखने को मिली है। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला दीदग के छात्र अब केवल किताबों तक सीमित नहीं हैं। पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी विषय की पढ़ाई कर रहे इन विद्यार्थियों ने हाल ही में पर्यटन व्यवसाय की बारीकियां सीखीं। हरिपुरधार के निकट मानव हिल रिसॉर्ट में दो दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन हुआ। इसमें लगभग तीन दर्जन छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया और रिसॉर्ट में रात्रि ठहराव कर व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया।

होटल मैनेजमेंट का मिला रियल-टाइम अनुभव

इस कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से हटकर होटल संचालन की जमीनी हकीकत से रूबरू कराया गया। छात्रों ने स्वयं रिसॉर्ट के भीतर रूम सर्विस, हाउसकीपिंग और साफ-सफाई जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को अंजाम दिया। इसके अलावा उन्हें कैटरिंग, कुकिंग, टेंटिंग और रिसॉर्ट प्रबंधन की बारीकियों के बारे में विस्तार से समझाया गया। रिसॉर्ट के प्रबंध निदेशक मेलाराम शर्मा ने स्वयं छात्रों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने बच्चों को बताया कि हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में करियर बनाने के लिए व्यावहारिक दक्षता कितनी अनिवार्य है।

पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं

प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञ ने छात्रों को हिमाचल में पर्यटन की भविष्यगामी संभावनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिमाचल का नैसर्गिक सौंदर्य और स्वच्छ वातावरण वैश्विक स्तर पर सैलानियों को आकर्षित करता है। इस व्यवसाय के माध्यम से विद्यार्थी न केवल अपना भविष्य संवार सकते हैं, बल्कि दूसरों को भी रोजगार दे सकते हैं। वर्तमान समय में होटल और पर्यटन उद्योग अच्छी खासी आमदनी का बेहतरीन जरिया बन चुका है। छात्र अब इसे अपने जीवन यापन का सशक्त साधन बना सकते हैं।

पढ़ाई के साथ रोमांच और हिमाचली संस्कृति का तड़का

कार्यशाला केवल प्रशिक्षण तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि छात्रों के सर्वांगीण विकास पर भी ध्यान दिया गया। दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को ट्रैकिंग पर ले जाया गया ताकि वे साहसिक पर्यटन को समझ सकें। शाम के समय बोनफायर का आयोजन किया गया, जहां डीजे म्यूजिक की धुनों पर छात्रों ने खूब मस्ती की। हिमाचली लोक संगीत के माध्यम से उन्हें सांस्कृतिक विरासत से जोड़ा गया। इस तरह के आयोजनों से छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ता है और वे भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार होते हैं।

स्कूली पाठ्यक्रम में व्यावसायिक शिक्षा की अहमियत

व्यावसायिक शिक्षा के महत्व को देखते हुए हिमाचल के स्कूलों में इस तरह के प्रैक्टिकल सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कौशल विकास से ही बेरोजगारी की समस्या को हल किया जा सकता है। दीदग स्कूल के विद्यार्थियों का यह अनुभव उन्हें अन्य छात्रों से अलग बनाता है। अब ये छात्र न केवल पर्यटन की थ्योरी जानते हैं, बल्कि वे जानते हैं कि एक अतिथि का सत्कार कैसे किया जाता है। शिक्षा विभाग के इस कदम की चारों ओर सराहना हो रही है।

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