New Delhi: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा शिखर सम्मेलन’ के दौरान आतंकवाद के खिलाफ भारत की बदलती रणनीति पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने वैश्विक स्तर पर यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब केवल कूटनीतिक बयानों तक सीमित रहने वाली पुरानी मानसिकता से बाहर निकल चुका है। मोदी सरकार के नेतृत्व में भारत अब आतंकी हमलों की स्थिति में घर में घुसकर निर्णायक कार्रवाई करने की अटूट प्रतिबद्धता रखता है। यह ऑपरेशन भारत की सैन्य शक्ति और जीरो-टोलरेंस नीति का जीवंत प्रमाण है।
72 घंटों में आतंकवाद का सफाया
ऑपरेशन सिंदूर को प्रतिरोध का प्रतीक बताते हुए रक्षा मंत्री ने खुलासा किया कि यह सैन्य अभियान मात्र 72 घंटों में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया था। हालांकि, इसकी तैयारियां काफी समय से गुपचुप तरीके से चल रही थीं। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत ने यह ऑपरेशन अपनी शर्तों और अपने चुने हुए समय पर अंजाम दिया। भारत न केवल परमाणु धमकियों के आगे झुका, बल्कि उसने अपने निर्धारित लक्ष्यों को भी प्राप्त किया। इस कार्रवाई ने साबित कर दिया कि भारत की सेना, नौसेना और वायुसेना एक एकीकृत वैश्विक शक्ति बन चुकी हैं।
एआई और स्वदेशी हथियारों का दम
रक्षा क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के महत्व पर जोर देते हुए राजनाथ सिंह ने ‘सुदर्शन वायु रक्षा प्रणाली’ और एआई (AI) आधारित ‘रुद्र’ ब्रिगेड जैसी इकाइयों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब आतंकवादियों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद वैश्विक स्तर पर भारतीय हथियारों की विश्वसनीयता बढ़ी है और कई देश अब भारत से रक्षा उपकरण खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं। भारत अब एक आत्मनिर्भर और तकनीक-संचालित सैन्य मशीन में बदल रहा है।


