Shimla News: हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में नियुक्तियों और पदोन्नतियों में कथित अनियमितताओं को लेकर विवाद गहरा गया है। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया यानी एसएफआई ने इन मामलों पर कोई कार्रवाई न होने के विरोध में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार का घेराव किया। छात्र संगठन ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और एफआईआर दर्ज करने की जोरदार मांग की है।
यूजीसी नियमों के उल्लंघन और गलत नियुक्तियों का आरोप
छात्र संगठन का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को लाभ पहुंचाया है। लाइफ लॉन्ग लर्निंग विभाग में नियमों को बदलकर एक विशेष व्यक्ति की नियुक्ति का प्रयास किया गया। इसके लिए बिना मंजूरी के पांच साल का रिसर्च एक्सपीरियंस अनिवार्य कर दिया गया। इस मामले में तत्कालीन रजिस्ट्रार के खिलाफ एसआईटी जांच की मांग की जा रही है।
एसएफआई ने इंस्टीट्यूट ऑफ वोकेशनल स्टडीज में प्रोफेसर पद पर हुई नियुक्ति पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन के अनुसार संबंधित व्यक्ति ने यूजीसी द्वारा तय न्यूनतम सर्विस पीरियड को पूरा नहीं किया था। इसके बावजूद उसे प्रोफेसर पद की जिम्मेदारी दे दी गई। इस पक्षपातपूर्ण रवैये के खिलाफ छात्रों में भारी रोष देखने को मिल रहा है।
न्यायिक जांच न होने पर बड़े आंदोलन की दी चेतावनी
छात्र नेताओं ने साल 2010 और 2018 के बाद करियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत हुई सभी पदोन्नतियों की न्यायिक जांच की मांग की है। अवैध रूप से दिए गए वित्तीय लाभों की रिकवरी करने और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने को कहा गया है। कैंपस सेक्रेटरी मुकेश ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।
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