बच्चा करियर को लेकर है लापरवाह? पेरेंटिंग कोच की ये 7 बातें आज ही बदल देंगी उसका भविष्य

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Education News: हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा अपने करियर के प्रति गंभीर रहे। लेकिन पंद्रह-सोलह साल की उम्र में अक्सर बच्चे भविष्य को लेकर लापरवाह दिखते हैं। इससे परेशान होकर माता-पिता गुस्सा करते हैं। पेरेंटिंग कोच पुष्पा शर्मा के अनुसार बच्चों को डांटने के बजाय सही दिशा दिखाना जरूरी है। अगर इस उम्र में बच्चों को कुछ खास बातें समझा दी जाएं तो उनकी सोच पूरी तरह बदल सकती है। बच्चा खुद अपने करियर को लेकर सजग हो जाएगा।

भविष्य का निर्माण आज से ही होता है

पेरेंटिंग कोच पुष्पा शर्मा मानती हैं कि भविष्य अचानक नहीं बनता है। आप अपने बच्चे को साफ शब्दों में यह बात समझाएं। बच्चा आज जो काम कर रहा है, वही उसका आने वाला कल तय करेगा। अगर वह आज अपना कीमती समय बर्बाद करेगा तो आगे भी उसे यही आदत रहेगी। बच्चे को बताएं कि हर दिन की छोटी-छोटी मेहनत ही बड़े और शानदार परिणाम लाती है। समय का सही इस्तेमाल ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।

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सोचने के बजाय एक्शन लेना शुरू करें

अक्सर किशोर कहते हैं कि उन्हें करियर के बारे में कुछ समझ नहीं आ रहा है। ऐसे में बच्चों को समझाना बहुत जरूरी है।

  • सिर्फ बैठकर सोचने से कभी सही रास्ता नहीं मिलता है।
  • बच्चों को हमेशा कुछ न कुछ नया करते रहना चाहिए।
  • छोटे-छोटे काम शुरू करने से ही उन्हें अपनी मंजिल समझ में आने लगेगी।
  • सिर्फ ख्याली पुलाव पकाने के बजाय जमीन पर एक्शन लेना सबसे ज्यादा जरूरी है। इसी से उन्हें स्पष्टता मिलेगी।

आदतें ही बच्चे की असली पर्सनैलिटी बनाती हैं

बच्चे को अपनी आने वाली जिंदगी की कल्पना करने के लिए कहें। वह किस तरह का जीवन और कैसे लोग चाहता है, यह स्पष्ट होना चाहिए। अगर अभी से टालमटोल की आदत पड़ गई तो आगे यही उसकी पर्सनैलिटी बन जाएगी। इसलिए समय पर पढ़ाई करना और जिम्मेदारी लेना बहुत जरूरी है। आज की दुनिया में बहुत ज्यादा कॉम्पिटिशन है। अगर बच्चा सिर्फ औसत मेहनत करेगा तो उसे जिंदगी में भी सबकुछ औसत ही मिलेगा।

दोस्तों की अंधी नकल से बचें और खुद फैसले लें

इस उम्र के बच्चों पर दोस्तों का बहुत गहरा असर होता है। बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि सिर्फ दोस्तों के पीछे चलना सही नहीं है। बिना सोचे-समझे दूसरों की नकल करने से आत्मविश्वास कम होता है। बच्चे को अपने अहम फैसले खुद लेना सीखना होगा। इसके अलावा पढ़ाई से बचने की आदत आगे चलकर मुश्किलें बढ़ाएगी। जिंदगी में कुछ भी आसानी से नहीं मिलता है। आज की मेहनत ही कल के भारी संघर्ष को कम करेगी।

सकारात्मक बातचीत से दूर करें बच्चे का तनाव

किशोर अवस्था में बच्चों के शरीर और दिमाग में कई तरह के बदलाव होते हैं। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि इस दौरान माता-पिता को बहुत धैर्य रखना चाहिए। बच्चों के साथ लगातार एक सकारात्मक संवाद बनाए रखना जरूरी है। अपनी उम्मीदों का बोझ बच्चों पर बिल्कुल न डालें। उनकी रुचि और क्षमता को समझकर ही करियर चुनने में उनकी मदद करें। माता-पिता का सही मार्गदर्शन ही बच्चे को एक सफल और जिम्मेदार नागरिक बना सकता है।

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