Business News: ‘महंगाई डायन खाई जात है’ यह लोकप्रिय फिल्मी गाना आज देश के करोड़ों नागरिकों के लिए कड़वी सच्चाई बन चुका है। हाल ही में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी ने आम जनता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इस मूल्य वृद्धि का सीधा असर लोगों के खान-पान से लेकर रोजमर्रा की हर वस्तु पर पड़ने लगा है। माल ढुलाई महंगी होने से आने वाले दिनों में खुदरा बाजारों में जरूरी सामानों की कीमतें और बढ़ने की पूरी आशंका है।
कमर्शियल वाहनों की माल ढुलाई लागत बढ़ने से व्यापारी बढ़ाएंगे दाम
भारत में ज्यादातर आवश्यक सामानों की आपूर्ति ट्रक, टेंपो और अन्य कमर्शियल वाहनों के जरिए एक राज्य से दूसरे राज्य में होती है। जब भी देश में ईंधन महंगा होता है, तो ट्रांसपोर्ट कंपनियों का परिचालन खर्च अचानक बढ़ जाता है। कंपनियां और बड़े व्यापारी इस अतिरिक्त वित्तीय बोझ को खुद उठाने के बजाय सीधे तौर पर अंतिम उपभोक्ताओं की जेब पर डाल देते हैं। इसके कारण उत्पादन से लेकर डिलीवरी तक की पूरी चेन प्रभावित होती है।
माल ढुलाई महंगी होने से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी ये 8 प्रमुख चीजें
- फल और हरी सब्जियां: मंडियों तक माल पहुंचने की लागत बढ़ने से इनके दाम सबसे पहले बढ़ेंगे।
- दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स: पैकेज्ड दूध, दही, पनीर और ब्रेड की कीमतों में जल्द ही इजाफा हो सकता है।
- राशन और पैकेज्ड फूड: आटा, दाल, तेल और पैकेट बंद खाद्य पदार्थों की खुदरा कीमतें बढ़ सकती हैं।
- ऑनलाइन डिलीवरी चार्ज: ई-कॉमर्स और फूड डिलीवरी कंपनियां अपने लॉजिस्टिक्स शुल्क में बढ़ोतरी कर सकती हैं।
- सार्वजनिक परिवहन किराया: स्थानीय बसों, टैक्सियों और ऑटो के किरायों में तत्काल वृद्धि देखी जा सकती है।
- भवन निर्माण सामग्री: सीमेंट, सरिया, ईंट और बालू जैसी बुनियादी चीजें परिवहन खर्च के कारण महंगी होंगी।
- कपड़े और घरेलू सामान: रेडीमेड गारमेंट्स और होम अप्लायंसेज के लॉजिस्टिक्स खर्च में बढ़ोतरी होना तय है।
- रसोई गैस और उपभोक्ता वस्तुएं: गैस सिलेंडर और अन्य जरूरी घरेलू सामानों पर सीधा असर पड़ेगा।
सब्जियों की कीमतों पर सबसे पहले दिखेगा असर, बढ़ सकता है डिलीवरी चार्ज
ईंधन महंगा होने का सबसे पहला और सीधा हमला हमारी रसोई पर होता है। हरी सब्जियों और ताजे फलों को हर दिन लंबी दूरी तय करके मुख्य शहरों की मंडियों तक लाया जाता है। ट्रांसपोर्टेशन महंगा होने से इनके दाम तुरंत बढ़ जाते हैं। इसके साथ ही स्विगी, जोमैटो और एमेजन जैसी प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियां भी अपने डिलीवरी चार्ज में बढ़ोतरी कर सकती हैं। इससे घर बैठे सामान मंगाना आम उपभोक्ताओं के लिए काफी खर्चीला साबित होगा।
लोकल किराया बढ़ने से नौकरीपेशा वर्ग का मासिक बजट पूरी तरह बिगड़ेगा
पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने के कारण स्थानीय स्तर पर चलने वाली बसों, ऑटो और टैक्सियों का किराया बढ़ना तय है। रोज सफर करने वाले कामकाजी और नौकरीपेशा लोगों का मासिक यात्रा बजट इससे पूरी तरह बेपटरी हो जाएगा। इसके अलावा, माल ढुलाई की लागत बढ़ने से निर्माण सामग्री भी काफी महंगी हो जाएगी। वर्तमान में सीमेंट और सरिया के दाम बढ़ने से नया घर बनाना या पुराने घर की मरम्मत कराना बेहद मुश्किल होगा।
सीमित आमदनी वाले मध्यम वर्ग पर पड़ेगा महंगाई का सबसे क्रूर प्रहार
अगर देश में ईंधन की कीमतों में वृद्धि का यह सिलसिला इसी तरह जारी रहा, तो आने वाले समय में खुदरा महंगाई दर अनियंत्रित हो सकती है। इस आर्थिक मंदी का सबसे क्रूर प्रहार देश के मध्यम वर्ग और वेतनभोगी लोगों पर पड़ेगा। इन परिवारों की मासिक आमदनी पूरी तरह सीमित होती है, जबकि उनके दैनिक खर्च लगातार रॉकेट की तरह बढ़ रहे हैं। ट्रांसपोर्ट कॉस्ट में यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर आम आदमी की बचत को खत्म कर रही है।


