Navi Mumbai News: महाराष्ट्र राज्य साइबर विभाग (महा साइबर) ने नवी मुंबई में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. पुलिस ने टेलीग्राम ऐप के जरिए बाल यौन शोषण और उत्पीड़न सामग्री (CSEAM) की अवैध बिक्री और प्रसार करने के आरोप में एक युवक को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है.
पकड़े गए आरोपी की पहचान आदिराज राजेंद्र बैत के रूप में हुई है. महाराष्ट्र साइबर विभाग ने बेहद आधुनिक तकनीकी जांच और खुफिया जानकारी के आधार पर इस घिनौने रैकेट का पर्दाफाश किया है. आरोपी की भूमिका पूरी तरह सामने आने के बाद उसे आगे की कार्रवाई के लिए एनआरआई पुलिस स्टेशन को सौंप दिया गया है.
क्या होती है यह आपत्तिजनक सामग्री?
साइबर अधिकारियों के अनुसार, बाल यौन शोषण सामग्री (CSEAM) के तहत ऐसी किसी भी प्रकार की दृश्य या डिजिटल सामग्री को शामिल किया जाता है, जिसमें नाबालिग बच्चों को किसी भी तरह की यौन गतिविधियों में दिखाया गया हो. यह कानूनन एक बेहद गंभीर और गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आता है.
इस तरह की अवैध सामग्री में बच्चों के फोटो, वीडियो, लाइव स्ट्रीमिंग और यहां तक कि आधुनिक एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) तकनीक की मदद से तैयार की गई फर्जी तस्वीरें भी शामिल हैं. महाराष्ट्र साइबर टीम को काफी समय से इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार की खुफिया जानकारी मिल रही थी.
यूपीआई आईडी और डिजिटल फॉरेंसिक से खुला राज
खुफिया इनपुट मिलने के बाद साइबर सेल ने आधुनिक तकनीकी उपकरणों की मदद से अपनी गुप्त जांच शुरू की. तकनीकी विश्लेषण से यह पूरी तरह साफ हो गया कि बच्चों के शोषण से जुड़ी ये अवैध गतिविधियां महाराष्ट्र की सीमा के भीतर से ही सक्रिय रूप से संचालित की जा रही थीं, जिसके बाद जाल बिछाया गया.
अधिकारियों ने जांच के दौरान आरोपी द्वारा इस्तेमाल की जा रही एक यूपीआई (UPI) आईडी और ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) से मिले डिजिटल इनपुट्स का गहन विश्लेषण किया. इन पुख्ता सबूतों के आधार पर ही आरोपी आदिराज बैत को ट्रैक किया गया और उसे पूछताछ के लिए साइबर दफ्तर बुलाया गया.
मोबाइल से बरामद हुए चौंकाने वाले सबूत
पूछताछ के दौरान कड़ाई बरतने पर आरोपी के पास मौजूद मोबाइल फोन को तुरंत जब्त कर लिया गया. इसके बाद फोन की गहन डिजिटल फॉरेंसिक जांच कराई गई. इस फॉरेंसिक विश्लेषण में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपी के मोबाइल में बाल यौन शोषण से जुड़ी भारी मात्रा में सामग्री संग्रहित थी.
आरोपी इन वीडियो और तस्वीरों को टेलीग्राम चैनलों के माध्यम से मोटी रकम लेकर बेचने और इंटरनेट पर आगे प्रसारित करने की पूरी तैयारी में था. जांच में मिले इन अकाट्य तकनीकी सबूतों के आधार पर महाराष्ट्र साइबर विभाग ने आरोपी के खिलाफ गंभीर धाराओं में आपराधिक मामला दर्ज कर लिया है.
डार्क नेट पर साइबर सेल की पैनी नजर
साल 2016 में स्थापित हुआ महाराष्ट्र राज्य साइबर विभाग का अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) कार्यालय राज्य में साइबर अपराधों से जुड़े मामलों की मुख्य नोडल एजेंसी है. यह विभाग लगातार डार्क नेट, टेलीग्राम और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की कड़ाई से निगरानी करता है ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके.
महाराष्ट्र साइबर विभाग ने आम जनता और इंटरनेट यूजर्स के लिए एक सख्त चेतावनी भी जारी की है. विभाग ने साफ कहा है कि सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप, डार्क वेब या किसी भी अन्य डिजिटल माध्यम के जरिए बच्चों के शोषण से जुड़े अपराधों में शामिल पाए जाने वाले लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा.
Author: Raj Thakur


