New Delhi News: भारत में एक जून को मई महीने के जीएसटी कलेक्शन के आंकड़े जारी होने जा रहे हैं। पूरी दुनिया की नजरें इन अहम आर्थिक आंकड़ों पर टिकी हैं। इससे देश के घरेलू व्यापार और लोगों की खपत का सीधा पता चलेगा। ये आंकड़े भविष्य की वित्तीय नीतियों की दिशा भी तय करेंगे।
पिछले महीने अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन ने 2.10 लाख करोड़ रुपये का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया था। हालांकि मार्च क्लोजिंग के बाद मई में थोड़ी गिरावट आम बात है। आर्थिक जानकारों का अनुमान है कि इस बार यह आंकड़ा 1.70 से 1.75 लाख करोड़ रुपये के बीच रह सकता है।
ऊंची ब्याज दरों के बावजूद बाजार में ग्राहकों की मांग लगातार स्थिर बनी हुई है। पिछले कुछ महीनों के बेहतरीन आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाते हैं। ई-वे बिल के लगातार बढ़ते आंकड़े बताते हैं कि देश में सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में जबरदस्त तेजी बनी हुई है।
शेयर बाजार और निवेशकों पर क्या होगा असर?
इन मजबूत आंकड़ों से साफ है कि मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर लगातार अपना विस्तार कर रहे हैं। शेयर बाजार के निवेशकों के लिए ये आंकड़े बहुत जरूरी हैं। अगर मई का जीएसटी कलेक्शन उम्मीद से बेहतर रहता है, तो जून की शुरुआत में भारतीय रुपये और शेयर बाजार में भारी उछाल आ सकता है।
जीएसटी के इस शानदार प्रदर्शन से कंपनियों के आने वाले तिमाही नतीजों का भी सटीक अंदाजा लगाया जा सकता है। यह डेटा मौजूदा बिजनेस माहौल को समझने के लिए एक शानदार ट्रैकर का काम करता है। इससे निवेशकों का भरोसा भारतीय बाजार में और ज्यादा मजबूत होता है।
राजकोषीय घाटे और आरबीआई की नीतियों पर प्रभाव
राज्यों के बीच राजस्व का सही बंटवारा वहां की आर्थिक स्थिति और मांग को दिखाता है। शानदार टैक्स कलेक्शन से सरकार को अपना राजकोषीय घाटा कम करने में बड़ी मदद मिलती है। इससे सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर और बड़े प्रोजेक्ट्स पर ज्यादा पैसा खर्च कर पाती है, जो लंबे विकास के लिए जरूरी है।
अच्छी कमाई होने से केंद्र सरकार को बाजार से ज्यादा कर्ज नहीं लेना पड़ता है। इससे राज्यों को भी जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए मजबूती मिलती है। भारतीय रिजर्व बैंक अपनी अगली बैठक से पहले इन आंकड़ों को बारीकी से देखेगा। इससे ब्याज दरों और महंगाई के अनुमान पर सीधा असर पड़ेगा।
Author: Rajesh Kumar


