पेट्रोल निर्यात पर सरकार का बड़ा हंटर! एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ते ही मची खलबली, जानें अपनी जेब पर असर

Business News: केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पेट्रोल के निर्यात पर एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। सरकार ने पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर अचानक 3 रुपये प्रति लीटर की नई स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी लागू कर दी है।

वैश्विक स्तर पर मिडिल ईस्ट में जारी भारी तनाव के कारण दुनिया भर के तेल बाजारों में हाहाकार मचा हुआ है। फरवरी के महीने में जो कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बिक रहा था, वह अब उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों को देखते हुए दुनिया भर की सरकारें अपने-अपने देशों में ईंधन की सप्लाई बनाए रखने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रही हैं। भारत सरकार का यह फैसला भी इसी रणनीति का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

डीजल और हवाई ईंधन के एक्सपोर्ट टैक्स में भारी कटौती

सरकार ने पेट्रोल पर नया टैक्स लगाने के साथ ही डीजल और विमान ईंधन के निर्यात शुल्क में बड़ी कटौती की है। जारी सरकारी आदेश के मुताबिक, अब डीजल के एक्सपोर्ट पर लगने वाली ड्यूटी को 23 रुपये से घटाकर सीधे 16.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

इसके अलावा हवाई ईंधन यानी एटीएफ पर लगने वाली स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी को भी 33 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 16 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि घरेलू स्तर पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में सरकार ने कोई बदलाव नहीं किया है।

इससे पहले अप्रैल और एक मई को भी सरकार ने डीजल और एटीएफ पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में कुछ बड़े बदलाव किए थे। अप्रैल में हाई स्पीड डीजल पर ड्यूटी बढ़ाकर 55.50 रुपये और एटीएफ पर 42 रुपये प्रति लीटर की गई थी, लेकिन तब पेट्रोल पर कोई टैक्स नहीं था।

क्या आम जनता के लिए महंगा होगा पेट्रोल?

आम उपभोक्ताओं के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस फैसले से पेट्रोल महंगा होगा। इसका सीधा जवाब है ‘नहीं’, क्योंकि सरकार का यह नया फैसला सिर्फ विदेशों में होने वाले एक्सपोर्ट पर लागू होगा। इसलिए देश के घरेलू खुदरा बाजारों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

हालांकि, वैश्विक संकट के कारण शुक्रवार को ही तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3-3 रुपये प्रति लीटर का बड़ा इजाफा किया था। साल 2022 के बाद यह पहली बार था जब सरकारी तेल कंपनियों ने आम जनता के लिए ईंधन की खुदरा कीमतें बढ़ाई थीं।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने मौजूदा समय में तेल कंपनियों की कमर तोड़ रखी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल के महंगे होने के कारण भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को चालू तिमाही में 57,000 करोड़ रुपये से लेकर 58,000 करोड़ रुपये तक का भारी नुकसान हो सकता है।

Author: Rajesh Kumar

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