हिमाचल प्रदेश में ड्रग माफिया पर बड़ा एक्शन, पुलिस अब खंगालेगी तस्करों के बैंक खाते और डिजिटल लेन-देन

Shimla News: हिमाचल प्रदेश में चिट्टे और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ पुलिस ने अपनी रणनीति बदल दी है। अब पुलिस केवल बरामदगी और गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी। पुलिस मुख्यालय ने स्पेशल टास्क फोर्स को ड्रग तस्करों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बैंक खातों और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की गहन जांच करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

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तस्करों के आर्थिक और वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करेगी पुलिस

इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य नशा तस्करों के पूरे आर्थिक तंत्र को पूरी तरह ध्वस्त करना है। पुलिस के अनुसार, ड्रग्स तस्करी एक संगठित और बड़ा लाभ कमाने वाला अपराध है। केवल नशे की खेप पकड़ने से यह सिंडिकेट कुछ समय बाद फिर सक्रिय हो जाता है। इसलिए अब शुरुआती स्तर से वित्तीय जांच की जाएगी।

डिजिटल साक्ष्यों को प्राथमिकता और फोरेंसिक जांच के निर्देश

जांच अधिकारी अब आरोपितों और उनके करीबियों के यूपीआइ भुगतान, मोबाइल बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म की जांच करेंगे। इसके अलावा संदिग्ध वित्तीय लेनदेन, हवाला नेटवर्क और बेनामी संपत्तियों को भी खंगाला जाएगा। तस्करों के मोबाइल और लैपटॉप से मिलने वाले डिजिटल साक्ष्यों की जरूरत पड़ने पर डिजिटल फोरेंसिक जांच भी कराई जाएगी।

एसटीएफ के लिए अनिवार्य प्रक्रिया का हिस्सा बना नया नियम

सरकार ने इस नए आदेश के माध्यम से वित्तीय जांच को बड़े ड्रग मामलों में अनिवार्य प्रक्रिया बना दिया है। पहले बैंक खातों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच का विकल्प था, लेकिन अब इसे अनिवार्य कर दिया गया है। इससे सभी एसटीएफ इकाइयों के लिए एक समान कार्यप्रणाली तय हो गई है, जिससे कोई चूक नहीं होगी।

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ड्रग माफिया की अवैध कमाई से अर्जित संपत्तियों का पता लगाकर उन्हें फ्रीज और कुर्क करने की कार्रवाई भी साथ-साथ चलेगी। पुलिस का मानना है कि तस्करों को जेल भेजने के साथ उनकी आर्थिक जड़ों पर प्रहार करना अधिक प्रभावी होगा। इस कदम से पुलिस अब तस्करी के पीछे काम करने वाले फाइनांसर और सप्लायरों तक आसानी से पहुंच सकेगी।

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