Delhi News: अगर आपने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 10 लाख रुपये से अधिक कीमत की नई कार खरीदी है, तो यह खबर आपके काम की है। इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करते समय आप कम से कम 10,000 रुपये या उससे ज्यादा का टैक्स रिफंड आसानी से हासिल कर सकते हैं।
इसके लिए आपको आईटीआर में कार खरीद पर कटे 1% टीसीएस (Tax Collected at Source) का सही तरीके से दावा करना होगा। अक्सर लोग इस टैक्स क्रेडिट को क्लेम करना भूल जाते हैं, जिससे उनका पैसा सरकार के पास ही रह जाता है। थोड़ी सी जागरूकता से आप यह पैसा वापस पा सकते हैं।
आयकर नियमों के अनुसार, 10 लाख रुपये से महंगी कार की बिक्री पर डीलर को 1% टीसीएस वसूलकर सरकार के पास जमा करना होता है। यह कोई अतिरिक्त टैक्स नहीं है। यह आपके पैन (PAN) पर जमा होने वाला एडवांस टैक्स है, जिसे बाद में आईटीआर भरते समय एडजस्ट या रिफंड लिया जा सकता है।
जानिए कैसे करना है 1% टीसीएस का सही दावा
आईटीआर भरने से पहले सुनिश्चित करें कि कार डीलर ने आपके पैन के खिलाफ टीसीएस जमा किया है या नहीं। इसके लिए आप Form 26AS और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) में एंट्री जरूर चेक करें। यदि वहां एंट्री नहीं दिख रही है, तो तुरंत अपने डीलर से संपर्क करें।
रिटर्न दाखिल करते समय ‘Taxes Paid’ या ‘TCS Credit’ सेक्शन में इस टीसीएस की सटीक जानकारी भरनी होगी। यदि आपकी कुल टैक्स देनदारी कटे हुए टीसीएस से कम है, तो बची हुई राशि रिफंड के रूप में आपके बैंक खाते में आ जाएगी। देनदारी ज्यादा होने पर यह राशि एडजस्ट हो जाएगी।
दावा करते समय पास रखें ये जरूरी दस्तावेज
टीसीएस का दावा करते समय कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने पास संभालकर रखें। इनमें कार खरीद का इनवॉइस, Form 27D (TCS Certificate), Form 26AS और एआईएस शामिल हैं। इन दस्तावेजों की मदद से आप आसानी से साबित कर सकते हैं कि आपके नाम पर टैक्स जमा हुआ है।
टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आईटीआर भरते समय केवल आय और टैक्स देनदारी ही नहीं, बल्कि टीडीएस और टीसीएस जैसी टैक्स क्रेडिट एंट्री भी ध्यान से जांचनी चाहिए। जानकारी की कमी के कारण हजारों रुपये का रिफंड छूट जाता है। इसलिए रिटर्न फाइल करने से पहले डेटा का मिलान जरूर करें।

