क्या भारत बंद कर सकता है पाकिस्तान का इंटरनेट? जानिए पड़ोसी देश के डिजिटल ढांचे की बड़ी कमजोरियां

New Delhi News: डिजिटल युग में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या भारत पड़ोसी देश पाकिस्तान के इंटरनेट को पूरी तरह ठप कर सकता है। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार भारत सीधे तौर पर ऐसा नहीं कर सकता। वैश्विक नेटवर्क पूरी तरह विकेंद्रीकृत है और कोई एक देश इसे नियंत्रित नहीं करता है।

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सीमित समुद्री केबलों पर निर्भरता पाकिस्तान की सबसे बड़ी कमजोरी

इसके बावजूद पाकिस्तान का डिजिटल बुनियादी ढांचा बेहद कमजोर है। संकट के समय इसमें आसानी से व्यवधान पैदा किया जा सकता है। पाकिस्तान वैश्विक कनेक्टिविटी के लिए मुख्य रूप से कुछ चुनिंदा समुद्री केबलों पर निर्भर है। इनमें प्रमुख रूप से सी-मी-वी-चार और सी-मी-वी-पांच शामिल हैं।

इसके विपरीत भारत के पास पंद्रह से अधिक सबमरीन केबल कनेक्शन मौजूद हैं। भारत के पास कई अंतरराष्ट्रीय मार्ग भी उपलब्ध हैं। पाकिस्तान के पास बेहद सीमित विकल्प हैं। इन समुद्री केबलों में आई मामूली खराबी भी वहां की इंटरनेट सेवा को पूरी तरह ठप कर सकती है।

साइबर हमलों से सरकारी सर्वर और संचार व्यवस्था होना मुमकिन

आधुनिक दौर में साइबर युद्ध किसी भी रणनीतिक संघर्ष का मुख्य हिस्सा बन चुका है। ऑनलाइन सेवाओं को रोकने के लिए डिस्ट्रीब्युटेड डेनियल ऑफ सर्विस जैसे डिजिटल हमले किए जाते हैं। इन हमलों से सरकारी सर्वर, टेलीकॉम गेटवे और मुख्य बुनियादी ढांचे को आसानी से निशाना बनाया जा सकता है।

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इंटरनेट रूटिंग प्रोटोकॉल में थोड़ा सा हस्तक्षेप भी आईपी ट्रैफिक को पूरी तरह रोक सकता है। इससे साइबर संघर्ष के दौरान डिजिटल संचार पूरी तरह प्रभावित हो जाता है। भारत पहले ही राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बने कई पाकिस्तानी यूट्यूब चैनलों और वेबसाइटों को ब्लॉक कर चुका है।

तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर न होना पाकिस्तान के लिए बड़ी चिंता

पड़ोसी देश की एक और बड़ी कमजोरी बाहरी प्रौद्योगिकी पर उसकी अत्यधिक निर्भरता है। पाकिस्तान के पास एक मजबूत रूट सर्वर निर्देशिका मौजूद नहीं है। इसके साथ ही देश के पास अपना कोई स्वतंत्र उपग्रह नेटवर्क भी नहीं है। इस वजह से अंतरराष्ट्रीय सहायता रुकते ही उसका सिस्टम खतरे में आ जाता है।

भारत भले ही सीधे तौर पर वहां का नेटवर्क बंद नहीं कर सकता। लेकिन सीमित कनेक्टिविटी मार्ग और साइबर कमजोरी पाकिस्तान को लाचार बनाती है। हाइब्रिड युद्ध के इस उभरते दौर में बाहरी तकनीक पर निर्भरता ही पाकिस्तान की डिजिटल सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चिंता बन गई है।

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