Himachal News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एक बहुत बड़ा ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य सरकार ने अपनी पुरानी ‘बेटी है अनमोल’ योजना का नाम बदल दिया है। अब इसे ‘इंदिरा गांधी सुख सुरक्षा योजना’ के नाम से जाना जाएगा। नई अधिसूचना के अनुसार यह योजना प्रदेश में एक अप्रैल 2026 से पूरी तरह लागू मानी जाएगी। इसके तहत बीपीएल परिवारों की बेटियों को 25 हजार रुपये की भारी आर्थिक सहायता मिलेगी।
योजना के तहत मिलेंगे 25 हजार रुपये
राज्य सरकार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को बड़ा तोहफा दे रही है। बीपीएल परिवार में बेटी के जन्म पर सरकार तुरंत पच्चीस हजार रुपये जमा करेगी। यह रकम सीधे एक अधिकृत इंश्योरेंस कंपनी में बच्ची के नाम पर सुरक्षित रखी जाएगी। जब वह बेटी 18 साल की उम्र पूरी कर लेगी, तब वह इस जमा रकम को आसानी से निकाल सकेगी। यह सरकारी पैसा बेटी की आगे की उच्च शिक्षा में बहुत काम आएगा।
माता-पिता को 2 लाख का जीवन बीमा
इस नई योजना में केवल बेटियों को नहीं बल्कि उनके माता-पिता को भी भारी लाभ मिल रहा है। सरकार बच्ची के माता-पिता या अभिभावकों को दो लाख रुपये का जीवन बीमा कवर प्रदान करेगी। यह सुविधा इसलिए दी गई है ताकि किसी अनहोनी की स्थिति में बच्ची का भविष्य खराब न हो। यह विशेष बीमा कवर बेटी के अठारह वर्ष की आयु तक या अधिकतम सत्ताईस वर्ष की आयु तक पूरी तरह से मान्य रहेगा।
योजना का लाभ लेने के लिए जरूरी शर्तें
सरकार ने इस बेहतरीन योजना का लाभ लेने के लिए कुछ बहुत जरूरी नियम और शर्तें तय की हैं।
- बीपीएल परिवार में जन्म लेने वाली पहली या दूसरी बेटी ही इस योजना की असली पात्र होगी।
- इस योजना का लाभ लेने के लिए बच्ची का जन्म एक अप्रैल 2026 या उसके बाद होना बहुत जरूरी है।
- लाभार्थी परिवार को ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल या फिर अपने नजदीकी सेवा केंद्र में जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
ये महत्वपूर्ण दस्तावेज होंगे बहुत जरूरी
सरकारी आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और आसान बनाया गया है। आवेदन करते समय परिवार को कुछ अहम कागजात जमा करने होंगे। इनमें बच्ची का जन्म प्रमाण पत्र, वैध बीपीएल प्रमाण पत्र और माता-पिता का आधार कार्ड जरूरी है। जब लाभार्थी बेटी 18 साल की हो जाएगी, तब उसे जमा राशि और उस पर मिलने वाले लाभ दे दिए जाएंगे। बेटी चाहे तो इस जमा राशि को 27 साल की उम्र तक अपने पास रख सकती है।
हिमाचल में तेजी से सुधरा लिंग अनुपात
महिला एवं बाल विकास विभाग की नई अधिसूचना में शानदार और सकारात्मक आंकड़े सामने आए हैं। हिमाचल प्रदेश में अब बेटियां बहुत खुशहाल हैं और लिंग अनुपात में भारी सुधार हुआ है। साल 2003 में राज्य का बाल लिंग अनुपात केवल 947 था। यानी एक हजार लड़कों पर 947 बेटियां थीं। वहीं अब साल 2024 के नए सरकारी आंकड़ों के अनुसार यह अनुपात बढ़कर 964 तक पहुंच चुका है। यह राज्य सरकार की एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।
योजना का उद्देश्य और संचालन प्रक्रिया
इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य संचालन महिला एवं बाल विकास विभाग ही करेगा। पुरानी ‘बेटी है अनमोल’ योजना साल 2010 में शुरू की गई थी। इसका मुख्य मकसद गरीब बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देना था। अब नई योजना की सरकार लगातार मॉनिटरिंग और कड़ा ऑडिट भी करेगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सरकारी लाभ सीधा बच्ची तक ही पहुंचे। योजना के धन का किसी भी प्रकार से कोई दुरुपयोग न हो, इसका प्रशासन पूरा ध्यान रखेगा।
बेटियों के सशक्तिकरण को मिलेगी नई दिशा
राज्य सरकार की इस नई पहल से प्रदेश भर में बेटियों के जन्म को भारी बढ़ावा मिलेगा। इंदिरा गांधी सुख सुरक्षा योजना लड़कियों की उच्च शिक्षा और सुरक्षा को एक नई मजबूती देगी। इससे गरीब परिवारों पर बेटियों की पढ़ाई का कोई भारी आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। सरकार का यह कदम समाज में लड़कियों के सामाजिक सशक्तिकरण को काफी तेज करेगा। राज्य सरकार भविष्य में भी महिला कल्याण के लिए इसी तरह की कई अन्य योजनाएं शुरू कर सकती है।


