International News: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भारी तनाव के बीच एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। ईरान के एक गुप्त ठिकाने के मलबे में करीब 450 किलोग्राम यूरेनियम दबा हुआ है। इस यूरेनियम को 60 प्रतिशत तक शुद्ध किया गया है। अब नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नजरें इस खजाने पर टिक गई हैं। खबर है कि अमेरिका इस यूरेनियम को ईरान से बाहर निकालने के लिए एक बेहद खुफिया जमीनी ऑपरेशन की योजना बना रहा है। अगर ऐसा होता है, तो यह आधुनिक इतिहास के सबसे जटिल और खतरनाक सैन्य अभियानों में से एक होगा।
क्यों इतना खतरनाक है यह यूरेनियम?
ईरान हमेशा से दावा करता है कि यह यूरेनियम केवल बिजली बनाने और मेडिकल रिसर्च के लिए है। लेकिन अमेरिका इस बात को सिरे से खारिज करता है। अमेरिका का साफ कहना है कि 60 फीसदी तक शुद्ध यूरेनियम परमाणु बम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर इस 450 किलो यूरेनियम को 90 फीसदी तक एनरिच कर लिया जाए, तो इससे 10 से 12 परमाणु बम बड़ी आसानी से बनाए जा सकते हैं। इसी खौफ के कारण अमेरिका किसी भी कीमत पर इसे ईरान से छीनना चाहता है।
ट्रंप का मास्टरप्लान और अमेरिकी कमांडो
डोनाल्ड ट्रंप का मुख्य लक्ष्य ईरान की परमाणु हथियार बनाने की क्षमता को हमेशा के लिए खत्म करना है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन अमेरिकी कमांडो को ईरान के अंदर भेजकर इस भंडार पर कब्जा करने की रणनीति बना रहा है। यह मिशन अमेरिकी सेना के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं होगा। यूरेनियम को वहां से निकालने के लिए सेना को भारी कार्गो विमानों की जरूरत पड़ेगी। इसके लिए उन्हें दुश्मन के इलाके में एक सुरक्षित रनवे भी तैयार करना पड़ सकता है।
क्या पहले भी हुआ है ऐसा कोई ऑपरेशन?
अमेरिका के लिए यह काम बिल्कुल नया नहीं है। साल 1994 में भी अमेरिका ने ‘प्रोजेक्ट सफायर’ नाम का एक बड़ा मिशन अंजाम दिया था। उस समय अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने कजाकिस्तान से करीब 600 किलोग्राम वेपन-ग्रेड यूरेनियम सुरक्षित निकाला था। लेकिन जानकारों का मानना है कि कजाकिस्तान के मुकाबले ईरान में घुसकर ऐसा ऑपरेशन करना बहुत मुश्किल है। ईरान अपनी सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क है और वहां अमेरिकी सैनिकों की जान पर बहुत बड़ा खतरा मंडरा सकता है।


