Business News: अगर आप अब तक मामूली खांसी या जुकाम होने पर सीधे मेडिकल स्टोर से सिरप खरीद लेते थे, तो अब ऐसा करना नामुमकिन होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने देश भर में सभी तरह की सिरप आधारित दवाओं की ओवर-द-काउंटर (OTC) बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।
यह नया और कड़ा नियम 16 जून 2026 से पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू हो चुका है। इस फैसले के बाद अब कोई भी फार्मेसी या मेडिकल स्टोर संचालक बिना किसी वैध डॉक्टर के लिखित प्रिस्क्रिप्शन (पर्ची) के किसी भी ग्राहक को कोई भी लिक्विड सिरप दवा नहीं बेच सकेगा।
Schedule-K में हुआ बड़ा संशोधन, दुरुपयोग पर लगेगी रोक
समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने यह बड़ा कदम सिरप दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग, गुणवत्ता संबंधी गंभीर चिंताओं और बिना डॉक्टरी सलाह के अंधाधुंध सेवन को रोकने के लिए उठाया है। इसके लिए देश के दवा नियमों के ‘शेड्यूल-के’ (Schedule-K) में बड़ा संशोधन किया गया है।
इस तकनीकी संशोधन के जरिए सरकार ने “Syrups” को ओटीसी (OTC) यानी बिना पर्ची बिकने वाली दवाओं की श्रेणी से आधिकारिक तौर पर बाहर कर दिया है। सरकार का मानना है कि इस सख्त कदम से सेल्फ-मेडिकेशन की खतरनाक आदत पर लगाम लगेगी और मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं होगा।
5,700 करोड़ रुपये के विशालकाय बाजार को लगा तगड़ा झटका
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की एक होलिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में खांसी और जुकाम की लिक्विड दवाओं का मौजूदा बाजार करीब 5,700 करोड़ रुपये का है। यह विशालकाय सेगमेंट पूरे इंडियन फार्मास्युटिकल मार्केट (IPM) का लगभग 2.2 प्रतिशत का एक बड़ा हिस्सा संभालता है।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब तक होने वाली डायरेक्ट ओटीसी बिक्री का एक बहुत बड़ा हिस्सा तुरंत डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन वाली बिक्री में तब्दील नहीं हो पाएगा। इसकी वजह से आने वाले दिनों में कफ और कोल्ड सिरप के इस पूरे सेगमेंट की कुल मांग और रिटेल बिक्री में भारी गिरावट देखी जा सकती है।
खांसी की लिक्विड दवाओं का मार्केट सबसे ज्यादा प्रभावित
रिपोर्ट के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि इस पूरे लिक्विड सेगमेंट में अकेले खांसी की दवाओं का कारोबार ही करीब 4,700 करोड़ रुपये का है। जून 2023 में जब सरकार ने 14 फिक्स्ड-डोज कॉम्बिनेशन (FDC) कफ सिरप पर प्रतिबंध लगाया था, तब बाजार में थोड़ी रिकवरी जरूर दिखी थी।
लेकिन वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान इस पूरे बाजार की विकास दर लगभग स्थिर बनी रही। अब ओटीसी बिक्री बंद होने से दवा कंपनियों के सामने अपने प्रोडक्ट्स को बेचने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। कई नामी ब्रांड्स तकनीकी रूप से पहले भी प्रिस्क्रिप्शन दवाएं ही थे, लेकिन बिना कड़ाई के बिक रहे थे।
फार्मा सेक्टर की ओवरऑल ग्रोथ में आ सकती है गिरावट
कोटक की रिपोर्ट के अनुसार, यदि इस नए नियम के कारण देश भर में सालाना लगभग 1,000 करोड़ रुपये की सिरप बिक्री प्रभावित होती है, तो इसका सीधा असर देश की जीडीपी और फार्मा सेक्टर पर पड़ेगा। इससे भारतीय फार्मास्युटिकल मार्केट (IPM) की सालाना ग्रोथ रेट में 0.40% से 0.50% तक की कमी आ सकती है।
लंबे समय में यह बाजार केवल कुछ चुनिंदा और बेहद बड़े विश्वसनीय ब्रांडों तक ही सिमट कर रह जाएगा, जिससे छोटे निर्माताओं को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। आम उपभोक्ताओं को अब अस्पताल या डॉक्टर की फीस भरनी होगी, जिससे उनका चिकित्सा खर्च थोड़ा बढ़ सकता है लेकिन स्वास्थ्य सुरक्षित रहेगा।
Author: Rajesh Kumar


