International News: इटली की रहने वाली 12 साल की मासूम बच्ची रोसेला रोजेरो उगुएस की जिंदगी सोशल मीडिया एल्गोरिदम की खतरनाक गिरफ्त में आकर दर्दनाक तरीके से खत्म हो गई। रोसेला की मां आइरीन ने बेहद भावुक होकर बताया कि उनकी हंसती-खेलती बेटी के व्यवहार में अचानक बहुत डरावना बदलाव आया था।
खतरनाक और सुसाइडल कंटेंट परोस रहा था एल्गोरिदम
पीड़ित परिवार के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स लगातार रोसेला को खुद को नुकसान पहुंचाने (सेल्फ-हार्म) वाला डरावना कंटेंट दिखा रहे थे। एल्गोरिदम के इसी जानलेवा चक्रव्यूह में फंसकर आखिरकार रोसेला ने आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठा लिया। इस घटना के बाद से पूरे देश में भारी आक्रोश है।
मासूम रोसेला की मौत के बाद जब रोते-बिलखते माता-पिता ने उसका मोबाइल और लैपटॉप खंगाला, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। रोसेला उनकी सोच से कहीं ज्यादा समय सोशल मीडिया पर बिता रही थी। वह पूरी तरह से इस आभासी दुनिया के जाल में फंस चुकी थी।
फेक अकाउंट बनाकर डिप्रेशन की ओर बढ़ी
जांच में पता चला कि रोसेला ने इंस्टाग्राम पर ‘Just a dead pers0n’ नाम से एक सीक्रेट फेक अकाउंट बनाया था। चालाकी से इस यूजर नेम में अंग्रेजी के अक्षर ‘o’ की जगह ‘0’ (जीरो) का इस्तेमाल किया गया था ताकि वह किसी की नजर में न आ सके।
सितंबर 2023 से उसने इस अकाउंट पर डिप्रेशन और अवसाद से जुड़े बेहद गंभीर कंटेंट देखना शुरू कर दिया था। इस खतरनाक लत की शुरुआत के महज पांच महीने के भीतर ही उसकी मानसिक स्थिति इतनी बिगड़ गई कि उसने अपनी जीवनलीला ही समाप्त कर ली।
हंसती-खेलती बच्ची को निगल गई बीमारी
उत्तरी इटली के एस्टी शहर में रोते हुए आइरीन ने कहा कि एक समय ऐसा लगा मानो सोशल मीडिया का यह जानलेवा जाल अपने आप ही बढ़ता चला गया। इसने उसकी खुशमिजाज और मिलनसार बेटी के पूरे व्यक्तित्व को हमेशा के लिए कुचलकर रख दिया।
रोसेला के माता-पिता अब उन कई पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हो गए हैं, जिन्होंने इटली में पहली बार इंस्टाग्राम-फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा और टिकटॉक के खिलाफ एक बड़ा सामूहिक मुकदमा दायर किया है। परिवार नाबालिगों के लिए सख्त पाबंदी की मांग कर रहे हैं।
मेटा और टिकटॉक ने दावों को किया खारिज
मेटा के प्रवक्ता ने इन गंभीर आरोपों से पूरी तरह इनकार किया है। कंपनी का कहना है कि वे विशेष टीन अकाउंट्स और आधुनिक सुरक्षा उपायों के जरिए किशोरों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं। वहीं, टिकटॉक ने दावा किया कि वे 99 फीसदी हानिकारक कंटेंट हटा देते हैं।
इस बीच पूरे यूरोप में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जांच तेज हो गई है। ब्रिटेन ने अब 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूरी तरह रोक लगाने की योजना बनाई है। वहीं यूरोपीय संघ भी कड़े कानूनों के जरिए इन प्लेटफॉर्म्स पर दबाव बना रहा है।
Author: Pallavi Sharma


