समुद्र में अमेरिकी हमले का शिकार हुआ भारतीय जहाज, 2 जांबाज नाविकों के शव पहुंचे देश, जयशंकर ने अमेरिका को लताड़ा!

National News: ओमान के सोहार तट के पास अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का शिकार हुए मालवाहक जहाज ‘एमटी सेटेबेलो’ (MT Settebello) हादसे में जान गंवाने वाले दो भारतीय नाविकों के पार्थिव शरीर बुधवार को स्वदेश भेज दिए गए हैं। ओमान में मौजूद भारतीय दूतावास ने इस दुखद खबर की आधिकारिक पुष्टि की है।

दूतावास ने जताया गहरा शोक

भारतीय दूतावास ने हादसे में मारे गए भारतीय नाविकों आदित्य शर्मा और शिवानंद चौरसिया के पार्थिव शरीर भारत भेजे जाने की जानकारी देते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। इस भीषण हमले में कुल तीन भारतीय नाविकों की दर्दनाक मौत हुई थी।

राहत की बात यह है कि इस जहाज पर सवार अन्य 21 भारतीय चालक दल के सदस्यों को ओमान के समुद्री सुरक्षा केंद्र द्वारा चलाए गए एक कड़े खोज एवं बचाव अभियान के बाद सफलतापूर्वक बचा लिया गया। सभी सुरक्षित भारतीय नागरिक अब अपने वतन लौट रहे हैं।

भारतीय राजदूत ने बढ़ाया हौसला

ओमान में भारत के राजदूत प्रशांत पिसे ने भारत रवानगी से पहले चालक दल के सभी जीवित सदस्यों से मुलाकात की। उन्होंने अत्यंत कठिन और मौत के साए जैसी परिस्थितियों में भी सभी नाविकों द्वारा दिखाए गए अदम्य साहस और धैर्य की जमकर सराहना की।

यह खतरनाक हमला उस समय हुआ जब एमटी सेटेबेलो जहाज ओमान के सोहार तट से लगभग 30 समुद्री मील दूर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में था। जहाज पर कुल 24 भारतीय नागरिक सवार थे, जिनमें से 21 को सुरक्षित निकाला गया और तीन ने अपनी जान गंवा दी।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका के सामने दर्ज कराया कड़ा विरोध

इस गंभीर घटना के बाद भारत सरकार ने आक्रामक रुख अपनाते हुए अमेरिका के समक्ष कड़ा राजनयिक विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से सीधे फोन पर बातचीत कर निर्दोष भारतीय नागरिकों की मौत पर बेहद गंभीर चिंता जताई।

इसके साथ ही भारतीय विदेश मंत्रालय ने दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी जेसन मीक्स को तलब कर अपना कड़ा विरोध पत्र सौंपा। भारत ने स्पष्ट कहा कि नागरिक जहाजों पर इस तरह घातक सैन्य बल का इस्तेमाल किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

ईरानी तेल ले जाने का था आरोप

अमेरिकी सेना की ‘यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड’ (CENTCOM) ने जहाज पर इस बड़ी सैन्य कार्रवाई की पुष्टि की है। सेंटकॉम का दावा है कि यह जहाज कथित तौर पर अमेरिकी निर्देशों का पालन नहीं कर रहा था और अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आने वाला ईरानी तेल ले जा रहा था।

अमेरिकी पक्ष के मुताबिक, कार्रवाई से पहले चालक दल को कई बार चेतावनी दी गई थी, लेकिन बात न मानने पर बल प्रयोग किया गया। दूसरी ओर, भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और कानून आधारित व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाला एक गैर-जिम्मेदाराना कदम बताया है।

Author: Gaurav Malhotra

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